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अगले बरस तक के लिए पटना से विदा हुआ पुस्तकों का मेला, देखें तस्वीरें

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राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में 4 फरवरी से शुरू हुआ 23वां पुस्तक मेला 14 फरवरी को समाप्त हो गया। इस सांस्कृतिक महाकुंभ की सिर्फ यादें बच गई है। हम आपको इस महाकुंभ को तस्वीरों के माध्यम से दिखा रहे हैं।

पटना पुस्तक मेला कुछ न सिर्फ पाठकों के लिए एक बेहतर जगह साबित हुआ है, बल्कि सांस्कृतिक गतिविधियों का भी बेहतर मंच साबित हुआ है। बिहार के लोगों में की सामाजिक, राजनीतिक और साहित्यिक जागरूकता पुस्तक मेले में देखने को मिलती है।

पटना पुस्तक मेला लगने की शुरूआत वर्ष 1985 में हुई थी। उसके बाद दूसरा पुस्तक मेला 3 वर्ष बाद 1988 में लगा। फिर हर दूसरे वर्ष पुस्तक मेले का आयोजन होने लगा। वर्ष 2000 से यह प्रत्येक वर्ष लगने लगा।

पटना पुस्तक प्रेमियों के पढ़ने के उत्साह को देखते हुए वर्ष 2013 में मार्च और नवंबर में दो बार पुस्तक मेले का आयोजन किया गया था।

बिहार के लोगों में पढ़ने की काफी रूचि है। इस बात का जीता-जागता उदाहरण है पटना पुस्तक मेला। इस पुस्तक मेले की लोकप्रियता लेखक, प्रकाशक, छात्र, शिक्षक, बुद्धिजीवियों सहित सभी वर्ग के लोगों के बीच है।

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