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इनकी माने तो दुनिया की हर बुराई बस बिहार में है, जरा मुम्बई का रिजल्ट भी देखो

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बिहार में इंटर आर्ट्स के टॉपर गणेश कुमार के खिलाफ मीडिया ट्रायल चल रहा है। गणेश की योग्यता को परखने के लिए ऐसी होड़ मची है कि न्यूज चैनल के पत्रकार बूम माइक को उनके मुंह तक सटा दे रहे हैं।

ऐसा लगता है जेसे माइक मुंह में घुसेड़ कर ब्रेकिंग न्यूज ही निकाल लेंगे। गणेश से संगीत सब्जेक्ट पर सवाल पूछने वाले ज्ञानी रिपोर्टर ऐसा हावभाव दिखा रहे हैं जैसे वे संगीत के महापंडित हों। खबर को खोद कर बिहार निकालने वाले बंधुओं जरा अपने चैनल हेड और संपादकों को ये तो बताओ कि चमकदमक वाली मुम्बई का रिजल्ट कितना खराब हुआ है। मुम्बई यूनिवर्सिटी में 85 फीसदी छात्र फेल कर गये हैं। खोजी पत्रकार बंधुओं, आप तक ये खबर कैसे नहीं पहुंची ? या खबर जानबूझ कर भी दिखाया नहीं ? कहीं आप ये तो नहीं मानते हैं कि मुम्बई की बजाय बिहार की खबर अधिक बिकने वाली है ?

खबर बेचने के धंधे में मशगूल आप ये भी भूल गये कि इससे बिहार की तस्वीर खराब हो रही है । अगर सच दिखाने का इतना गुमान है तो फिर मुम्बई के बदतर रिजल्ट को क्यों नहीं दिखाते ?

मुम्बई यूनिवर्सिटी 1857 में खुली थी। यह देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में एक है। यहां बहुत अच्छे शिक्षक और छात्र हैं। संसाधनों की कोई कमी नहीं है। इसके बावजूद बीए के पहले सेमेस्टर में 85 फीसदी छात्र फेल कर गये। इस पर कोई क्या जवाब देगा ? यूनिवर्सिटी का कहना है कि सिलेबस में बदलाव की जानकारी छात्रों को सही समय पर नहीं मिली थी। देश के सबसे पुराने विश्वविद्यालय में इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई ? इस बात पर किसी ने सवाल नहीं पूछा। गणेश को निशाना बनाने वालों ने तो इस खबर को दिखाया भी नहीं।
मुम्बई यूनिवर्सिटी के छात्रों ने इस अन्याय के खिलाफ प्रदर्शन किया, विरोध किया लेकिन किसी चैनल ने नहीं दिखाया। अगर कुछ अंग्रेजी अखबारों में ये खबर नहीं छपी होती तो शायद किसी को ये मालूम भी नहीं होता।

क्या देश की मीडिया में एंटी बिहार फीलिंग है ? बिहार की खबरों को तिल का ताड़ कर के क्यों दिखाया जाता है ? बिहार 12वीं की परीक्षा में 64 फीसदी छात्र फेल कर गये।
ये दुखद बात है। खराब रिजल्ट को किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता। इसके पक्ष में कोई तर्क भी नहीं दिया जा सकता। लेकिन इस नाकामी को इस तरह से पेश किया जा रहा है जैसे पूरा रिजल्ट की गड़बड़ है। बिहार के छात्रों की प्रतिभा पर सवाल उठाये जा रहे हैं। इस तरह की कोशिश से बिहार को पहले ही बहुत नुकसान पहुंच चुका है। सिस्टम को ठीक करने पर सवाल उठाये जा सकते हैं लेकिन बिहार के सम्मान का भी ख्याल करना होगा।

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