THE BIHARI

इस बिहारी शख्स के काम को बहुत लोग जानते हैं, नाम को बहुत कम.. खैर पुराने गानों के सौखीन हैं तो इधर आईये

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आपको वो गाने याद हैं, जो आपकी कंघी करते वक्त आपकी मम्मी गुनगुनाती थीं, रेडियो के साथ? अब इनमें से वो गाने छांट लीजिए जो आपको तब भी अच्छे लगते थे, अब भी लगते हैं. बस इतनू सा फर्क है कि अब पसंद आने के साथ ये आपको समझ भी आते हैं. पीढ़ी दर पीढ़ी पसंद किए जाने वाले इन्हीं गानों के लिए शब्द गढ़ा गया है- क्लासिक. बता दूं कि इनमें से कई एक ऐसे शख्स के लिखे हैं जिसका नाम आपको नहीं मालूम – एस एच बिहारी. इन्होंने वो गाने लिखे, जिनमें से कई के बोल हम मौके दर मौके पंच लाइन की तरह इस्तेमाल करते हैं.

शम्स-उल हुदा बिहारी

एस एच बिहारी का पूरा नाम था शम्स-उल हुदा बिहारी. बिहार के आरा से थे,  उनकी कलम ही नहीं, उनके कदम भी कमाल के थे. एक वक्त उन्होंने फुटबॉल भी खेला, बाकायदा क्लब लेवल पर. कलकत्ता में फुटबॉल क्लब मोहन बागान के लिए खेले. जिस साल 1947 ने हिंदुस्तान की तकदीर बदली, उसने एस एच बिहारी की जिंदगी भी बदली. इस साल ये कलकत्ता से बंबई आए थे.

बिहारी ने गाने लिखने के साथ-साथ दूसरी चीज़ों में भी हाथ आज़माया. कहानी, पटकथा (इसी का नाम दुनिया है) और संवाद (कराटे) भी लिखे. लेकिन उनका नाम याद किया जाता है उनके लिखे गानों के लिए ही. बिहारी की सबसे अच्छी बात ये है कि उन्होंने रूपक को कभी हावी नहीं होने दिया. उन्होंने लिखा, ‘चांद सा रौशन चेहरा, झील सी नीली आंखें’, मगर लास्ट में हमें याद रह जाता है, ‘तारीफ़ करूं क्या उसकी, जिसने तुम्हें बनाया’. सीधी सादी बात. न उसे समझने में दिक्कत जिस के लिए कहा है, न उसके लिए समझना मुश्किल जो सुन रहा है. कोई ऐसा शब्द नहीं जो आम बोल चाल से अलग हो. इस तरह उनके गाने आम आदमी के गाने बन जाते हैं. कह सकते हैं कि मुकेश ने गायकी में जिस चीज़ को पकड़ा, बिहारी ने गाने लिखने में उसका ध्यान रखा – चीज़ों को सिंपल रखना. अनिल बिसवास के संपर्क में आने से पहले बिहारी एक रबर फैक्ट्री में असिस्टेंट मैनेजर थे. फिर इस लाइन में आए, लेकिन पक्की नौकरी छोड़कर कलम थामने के बाद किस्मत ने इनकी खूब परीक्षा ली. अपनी आंखों के सामने असरारुल हक मजाज़ को बंबई से नाकाम होकर लौटते देखा तो जो डर मन में बैठ गया. और वो सच भी हो गया. बाज़ू पर एक रूपए का सिक्का मंत्र फुंकवा कर बांधने तक की मजबूरी आई. लेकिन एक दिन वो भी आया जब हिम्मत लौटी. उस सिक्के को नोचकर निकाला और एक स्टूडियो के गेट के सामने भजिया चाय खा लिया. दोबारा शुरुआत की. धीरे-धीरे काम मिला और एक बार बिहारी-ओपी नैयर-आशा भोंसले की तिकड़ी पर लोगों का विश्वास बैठा तो इन्होंने फिर मुड़कर नहीं देखा.

गीतकारों को अपने हक के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा है. गाना सुनकर लोग पहली दाद हमेशा गाने वाले को देते हैं, उसके बाद बची-कुची तारीफ संगीतकार समेट लेते हैं. गीतकार का नाम हमेशा आखिर में आता है. रेडियो पर गीतकारों को क्रेडिट मिलना भी तब शुरू हुआ जब साहिर लुधियानवी इसके लिए लड़ पड़े. ऐसे में हैरानी नहीं, कि हम में से ज्यादातर लोग नहीं जानते कि एसएच बिहारी इतना कुछ लिख गए हैं. लेकिन अब आप जान गए हैं. ये नाम याद रखिएगा. शम्स-उल हुदा बिहारी.


सुनें उनके लिखे कुछ यादगार गानेः TOP 10


1. न ये चांद होगा न ये तारे रहेंगे मगर हम तुम्हारे रहेंगे (शर्त, 1954)

बिहारी को पहला ब्रेक अनिल बिसवास ने दिया था जो नए कलाकारों को ढूंढने और उन्हें मौका देने के लिए मशहूर थे. लेकिन बिहारी को पहचान मिली इसी गाने के बाद. जादू जितनी हेमंत कुमार की आवाज़ का था, उतना ही बिहारी के बोलों का भी है. सुनिए और देखिए कितनी सादगी के साथ अपने चाहने वाले को उम्र भर और उसके बाद तक के साथ का वादा किया गया है ः

2. आखों ही आंखों में इशारा हो गया (सीआईडी, 1956)

झूठ कहते हैं वो लोग जो कहते हैं कि उनकी कभी किसी से ‘नज़रा-नज़र’ नहीं हुई. पहले आपने देखा, फिर उसने देखा. कहा किसी ने कुछ नहीं. तब जैसा लगता है, बिहारी ने इस गाने में बता दिया है. बिहारी के लिखे के अलावा इस गाने में जो बात खास है, वो हैं गीता दत्त के एक्सप्रेशन. इसीलिए वीडियो चस्पा किया है. सुनें, देखेंः

3. तारीफ करूं क्या उसकी, जिसने तुम्हें बनाया (कश्मीर की कली 1964)

ये असल मायने में एक मुकम्मल म्यूज़िक वीडियो है. कहीं बजे, आपको शम्मी कपूर याद आ जाते हैं. आप याद करने लगते हैं कि पहली बार आपको कैसे डर लगा था कि शम्मी नाव से गिर तो नहीं जाएंगे. फिल्म का नाम आपको याद है, एक्टर का भी. आगे से याद रखिएगा कि शम्मी के खिलंदड़ अंदाज़ की बराबरी कर ले, ऐसा लिखने वाले का नाम था एसएच बिहारी.

4. कजरा मोहब्बत वाला अंखियों में ऐसा डाला (किस्मत 1968)

इसकी एक लाइन आशिकों का एंथम थी, है और रहेगी – ‘दुनिया है मेरे पीछे, लेकिन मैं तेरे पीछे.’ एक ‘स्ट्रॉन्ग स्टेटमेंट.’  लेकिन कमाल ये कि एकतरफा प्यार में दिया जाने वाला ताना बन कर खत्म नहीं होता. अगली ही लाइन है, ‘अपना बना ले मेरी जान’, प्यार भरा आग्रह. आगे की तारीफ आप खुद सुन कर करें.

5. ज़रा हौले हौले चलो मोरे साजना (सावन की घटा 1966)

नायिका (शर्मिला टैगोर) सूपर सीरियस नायक (मनोज कुमार) के टांगे पर चढ़ गई हैं, मनोज को मनाने. मनोज की मर्ज़ी के खिलाफ. ये है सिचुएशन. और सिचुएशन पर गाना. खूबी ये कि रेडियो पर भी सुनेंगे तो उपर लिखी बात जान जाएंगे. क्रेडिट बिहारी के अलावा दीजिए ओपी नैयर को जिन्होंने हॉर्सबीट पर गाना बनाया. ये धुन घोड़े की टापों की तरह होती है.

6.आओ हुज़ूर तुमको, सितारों में ले चलूं (किस्मत, 1968)

आशा, ओपी नैयर और एस एच बिहारी के कॉम्बिनेशन से बना ये गीत रूमानियत भरे गानों की लिस्ट में बरसों से ऊंची जगह कब्ज़ाए बैठा है. ये गाना बजता नहीं बहता है.

7. ज़रा प्यार कर ले, इकरार कर ले (मंगु, 1954)

शमशाद बेगम को अपनी मीठी-मीठी आवाज़ में इतनी मासूमियत के साथ प्यार का इज़हार करते, किसी से प्यार मांगते आपने नहीं सुना होगा. पढ़कर अतिशयोक्ति लगती है न, सुनकर शुबहा दूर करेंः

https://www.youtube.com/watch?v=hBXllPASmKo


8.कौन है जो सपनों में आया (झुक गया आसमान 1968)

रफी के गाए इस गाने से कोई संगीतप्रेमी अंजान हो, ऐसा हो नहीं सकता. इश्क का फलसफे के साथ क्या बेहतरीन तालमेल बिठाया है बिहारी साहब ने. खुद देख लीजिए, वे लिखते हैं,

‘जिस्म को मौत आती है लेकिन, रूह को मौत आती नहीं है

इश्क रोशन है रोशन रहेगा, रोशनी इसकी जाती नहीं’

9. तुम्हें अपना साथी बनाने से पहले (प्यार झुकता नहीं, 1985)

ये गाना बिहारी में वैरायटी की झलक दिखाता है. हिंदी सिनेमा पर इलज़ाम लगता है कि वो सिनेमा हॉल में पीछे की सीटों पर बैठने वालों का ध्यान ज़्यादा रखता है. गाने तो खासतौर पर वे ही अच्छे माने जाते हैं जिनमें ढेर सारी ‘छिपे’ हुए मतलब होते हैं. इस गाने में बिहारी मुहब्बत को मुकम्मल करने में आने वाली मुश्किलों को बता रहे हैं, उस भाषा में, जो सबके लिए सुलभ है. आम आदमी का गाना.

10. इशारों इशारों में दिल लेने वाले (कश्मीर की कली, 1966) 

बिहारी के कई गानों में नायक नायिका के बीच एक संवाद है. इसका उम्दा उदाहरण है गाना. ‘निगाहों निगाहों में दिल लेने वाले, बता ये हुनर तूने सीखा कहां से?’ जवाब मिलता है, ‘निगाहों निगाहों में जादू चलाना, मेरी जान सीखा है तुमने जहां से.’ जितना सुंदर सवाल है, उतना सुंदर जवाब.

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