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इस महीने होने वाले 6 बदलाव जो आपकी जेब भरने या ढीली करने के साथ-साथ आपका वक्त भी बचा सकते हैं

रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े इन बदलावों का असर जमीन से लेकर आसमान तक पड़ने वाला है

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आमतौर पर माना जाता रहा है कि देश में अर्थ तंत्र से संबंधित बड़े बदलाव नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत यानी एक अप्रैल से ही होती है. बीते वर्षों में मोदी सरकार ने इस मान्यता को तोड़ने का काम किया है. उदाहरण के लिए, पिछली सरकारों में रेल यात्रा के किरायों में बदलाव के लिए फरवरी के आखिरी हफ्ते में पेश होने वाले बजट का इंतजार करना होता था. इसके अलावा कर दरों और अर्थ तंत्र से जुड़े अन्य नियमों-प्रावधानों में भी बड़े बदलाव एक अप्रैल से ही किए जाने की अघोषित परंपरा रही थी.

अब धीरे-धीरे यह परंपरा टूटती हुई दिख रही है. बीती एक जुलाई को वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) लागू किए जाने सहित कई    बदलाव   लागू किए गए थे. इसके तीन महीने बाद यानी अक्टूबर में से भी देशवासियों को कई बदलावों से रूबरू होना है. ये सारे बदलाव लोगों के रोजमर्रा की जरुरतों से जुड़े हुए हैं. साथ ही, इसका असर जमीन (मेट्रो) से लेकर आसमान (हवाई यात्रा) तक पड़ने वाला है.

दूरसंचार कंपनियों के इंटरकनेक्शन चार्ज में कमी, कॉल रेट सस्ते होने की उम्मीद

बीते महीने भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने इंटरकनेक्ट यूजेज चार्ज (आईयूसी) की दरें 58 फीसदी घटाने का ऐलान किया था. एक अक्टूबर से यह आदेश लागू हो गया है. इसके तहत अब किसी ऑपरेटर का ग्राहक दूसरे ऑपरेटर के नेटवर्क पर कॉल करेगा तो उसे इस नेटवर्क के इस्तेमाल के एवज में प्रति मिनट छह पैसे का आईयूसी होगा. बीते महीने तक यह दर 14 पैसे थी. माना जा रहा है कि इसके लागू होने के बाद कॉल रेट और कम हो सकते हैं.

दूरसंचार क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक आईयूसी में बदलाव होने से रिलायंस जिओ सबसे अधिक फायदे में रहेगी. साथ ही, इस क्षेत्र में इसकी स्थिति पहले से और ज्यादा मजबूत होगी. दूसरी ओर एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया जैसे मौजूदा ऑपरेटरों के मुनाफे को चोट पहुंचने के आसार हैं. इन ऑपरेटरों के राजस्व का एक हिस्सा आईयूसी से आता है.

एसबीआई ने न्यूनतम बैलेंस सीमा और जुर्माने में कमी की

देश के सबसे बड़े व्यावसायिक बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने एक अक्टूबर से मेट्रो शहरों के ग्राहकों को खातों में न्यूनतम बैलेंस रखने के मामले में राहत दी है. इसके तहत अब किसी ग्राहक को अपने खाते में 3,000 रुपये का न्यूनतम बैलेंस रखना होगा. पहले यह 5,000 था. साथ ही, एसबीआई ने न्यूनतम बैलेंस नहीं रखने पर लगने वाले जुर्माने की राशि में भी कटौती की है. मेट्रो शहरों के लिए जुर्माने की राशि 30 से 50 रुपये कर दी गई है. पहले यह 40 से 100 रुपये के बीच थी. इस मामले में बैंक ने छोटे शहरों के ग्राहकों को भी राहत दी है. छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्र के खाताधारकों के लिए इसे 20 से 40 रुपये कर दिया गया है. पहले उनसे 75 रुपये तक की वसूली की जाती थी.

माना जा रहा है कि एसबीआई ने यह कदम न्यूनतम बैलेंस रखने के सख्त प्रावधानों का विरोध किए जाने के बाद उठाया है. इस प्रावधान के आलोचकों का मानना है कि बचत खातों में न्यूनतम जरूरी रकम रखने के प्रावधान की आड़ में सरकारी बैंक गरीबों की खून-पसीने की कमाई पर डाका डाल रहे हैं. इनका कहना है कि अधिकांश गरीब और निम्न आय वर्ग के लोगों को इसकी जानकारी नहीं हैं. इस वजह से उन्हें बतौर जुर्माना पैसे चुकाने पड़ रहे हैं. इस आरोप की पुष्टि इस बात से होती है कि अकेले स्टेट बैंक ने चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के दौरान इस तरीके से अपने खाताधारकों से 235 करोड़ रुपये की कमाई की थी. बताया जाता है कि अन्य बैंक भी इसी राह पर हैं.

इसके अलावा एसबीआई में मिल चुके (विलय) बैंकों की चेकबुक एक अक्टूबर से अमान्य हो गई है. साथ ही इन बैंकों के आईएफएससी कोड अक्टूबर से मान्य नहीं होंगे. एसबीआई में इसके पांच सहयोगी बैंकों- स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर और स्टेट बैंक ऑफ पटियाला क विलय किया गया है. इसके अलावा भारतीय महिला बैंक को भी स्टेट बैंक में मिलाया गया था.

पुराने बैंक खातों को बंद करवाने पर कोई चार्ज नहीं

एसबीआई ने इस महीने से ग्राहकों को एक और बड़ी राहत दी है. इसके तहत अब एक साल पुराने खाते को बंद करवाने या सेटल करने पर किसी ग्राहक को कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं देना होगा. हालांकि, यदि कोई ग्राहक खाता खोलने के 14 दिन बाद से लेकर एक साल भीतर ही इसे बंद करवाता है, तो उसे 500 रुपये चार्ज के साथ जीएसटी भी देना होगा. नए प्रावधान के मुताबिक 14 दिनों के अंदर खाता बंद करवाने पर भी कोई चार्ज नहीं लगेगा.

नेशनल हाईवे पर इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन की शुरुआत

एक अक्टूबर से नैशनल हाईवे (एनएच) पर इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन की शुरुआत की गई है. इसके बाद लोगों को टैक्स देने के लिए टोल प्लाजा पर रुकने की जरुरत नहीं होगी. इसके तहत जिन गाड़ियों पर फास्‍टैग लगाया गया है, उन्हें फायदा मिलेगा. इसके तहत गाड़ी के शीशे पर एक टैग लगाया जाता है, जिसे टोल प्‍लाजा पर लगी डिवाइस रीड कर लेती है. इससे टोल टैक्स का भुगतान इलेक्ट्रॉनिक तरीके से प्लाजा के खाते में हो जाता है. फास्टैग को ऑनलाइन रीचार्ज किया जा सकता है. साथ ही, इसके लिए कई बैंकों को भी अधिकृत किया गया है.

रसोई गैस और विमान ईंधन महंगे

इस महीने से रसोई गैस की कीमत में डेढ़ रुपये की बढ़ोतरी की गई है. इसके तहत अब दिल्ली में सब्सिडी वाले सिलेंडर (14.2 किलो) की कीमत 488.68 रुपये होगी. इससे पहले बीते महीने प्रति सिलेंडर सात रुपये की बढ़ोतरी की गई थी. बताया जाता है कि यह बढ़ोतरी मोदी सरकार की उस नीति का हिस्सा है जिसमें मार्च, 2018 तक रसोई गैस पर सब्सिडी खत्म करने की बात कही गई है. केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मानसून सत्र के दौरान संसद को बताया था कि तय अवधि में रसोई गैस पर सब्सिडी खत्म करने के लिए सरकारी पेट्रोलियम कपंनियों को इसकी कीमत में प्रति महीने चार रुपये बढ़ोतरी करने के लिए कहा गया है.

खाना पकाने के अलावा हवाई यात्रा करने के लिए भी अब लोगों को पहले से अधिक जेब ढीली करनी होगी. सरकार ने विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमत में छह फीसदी बढ़ोतरी करने का फैसला किया है. इसके बाद दिल्ली में एटीएफ की कीमत 3,025 रुपये बढ़कर 53,045 रुपये प्रति किलोलीटर हो गई है. हवाई यात्रा तय किए जाने के मानकों में एटीएफ का बड़ा योगदान होता है. इसे देखते हुए माना जा रहा है कि जल्द ही विमानन कंपनियां किराए में बढ़ोतरी कर सकती है.

दिल्ली मेट्रो के किराए में बढ़ोतरी

इस साल दूसरी बार दिल्ली मेट्रो में यात्रा करने वालों को दूसरी बार किराया बढ़ोतरी का दंश सहना पड़ सकता है. दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने 10 अक्टूबर से मेट्रो किराए में पांच से 10 रुपये की बढ़ोतरी का ऐलान किया है. इसके तहत न्यूनतम किराये में कोई बदलाव नहीं किया गया है. अभी यह 10 रुपये है. इसके बाद 20 रु, 30रु, 40 रु और 50 रुपये वाले स्लैब में 10 रुपये की बढ़ोतरी की है. इससे पहले बीते मई में डीएमआरसी के किराए में 40 फीसदी तक बढ़ोतरी की है.

फिलहाल इस मामले पर डीएमआरसी और दिल्ली की केजरीवाल सरकार आमने-सामने आ गई है. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने किराए में बढ़ोतरी से पहले डीएमआरसी के आय और खर्च का ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग की है. दूसरी ओर, डीएमआरसी का कहना है कि उसका ऑडिट नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी-कैग) करता है और इसे सार्वजनिक किया जा चुका है. साथ ही, इस बढ़ोतरी को लेकर डीएमआरसी की दलील है कि किराए की समीक्षा करने वाली समिति ने पहले ही इस साल दो बार बढ़ोतरी की सिफारिश की थी.

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