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उत्तरी बिहार नारियल की खेती के लिए अनुकूल : राधामोहन

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह ने कहा है कि कोसी समेत उत्तर बिहार की जमीन नारियल की खेती के लिए अनुकूल है. बिहार में 50 हजार हेक्टेयर में नारियल की खेती की जा सकती है. गुरुवार को बामेती में नारियल विकास बाेर्ड की स्थापना पर किसान प्रशिक्षण केंद्र सह क्षेत्रीय कार्यालय भवन के शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नारियल की खेती के साथ दूसरी खेती भी की जा सकती है.
1987 में बिहार में क्षेत्रीय नारियल विकास बोर्ड की स्थापना का निर्णय लिया गया था, लेकिन पूर्व की सरकार ने एक टीम का गठन कर इसे असम में शिफ्ट कर दिया. मैंने भी एक टीम गठित की और इसकी रिपोर्ट के आधार पर बिहार में इसकी स्थापना का निर्णय लिया. एक माह में इसका कार्यालय बनना शुरू हो जायेगा. इसके लिए धन उपलब्ध करा दिया गया है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नारियल की खेती बिहार के लिए वरदान साबित होगा. उन्होंने कहा कि राज्य में अब तक 1.62 लाख नारियल के पौधे बांटे गये हैं.
राधामोहन सिंह ने कहा कि एससी-एसटी को नारियल की खेती के लिए भी केंद्र ने 17 लाख रुपये उपलब्ध कराये हैं. केंद्र सरकार की देसी गाय की नस्ल के विकास के लिए गोकुल योजना शुरू करने, इमारती लकड़ी की खेती के लिए आठ राज्यों में किसानों को मदद करने की जानकारी देेते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत अब नारियल तेल और सूखा नारियल का निर्यातक बन चुका है. बिहार में भी नारियल की 14.900 हेक्टेयर में खेती होती है.
शिलान्यास समारोह में दीघा विधायक संजीव चौरसिया, दानापुर के विधायक अाशा सिन्हा, आइसीएआर के निदेशक बीपी भट्ट, नारियल विकास बोर्ड के कोच्ची के अधिकारी डाॅ पी सोदप्पा, बिहार नारियल विकास बोर्ड के सचिव एके सिन्हा, एनपीसीसी के चेयरमैन व निदेशक एमएल चौधरी, जोनल मैनेजर यूएन ठाकुर और एनपीसीसी से जुड़ी अनामिका सिंह आिद मौजूद थीं.

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