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कैबिनेट फेरबदल से पूरा होगा मोदी-शाह के मिशन 2019 का सपना!

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लंबे इंतजार के बाद आखिर मोदी कैबिनेट का विस्तार हो ही गया. लेकिन, विस्तार से ज्यादा चर्चा नए मंत्रियों को दी गई जिम्मेदारियों को लेकर हो रही है. रक्षा मंत्रालय से लेकर रेल मंत्रालय तक हर जगह बदलाव दिख रहा है. मोदी ने जिस 4 पी के फॉर्मूले को बदलाव का आधार बनाया था, उस बदलाव का असर कैबिनट में  दिख भी रहा है.

मोदी ने अपने तीसरे कैबिनेट विस्तार में 4 पी के फॉर्मूले को सामने लाया था. मोदी ने जिस 4 P का जिक्र किया है, वो हैं…पैशन, प्रोफिसिएंसी, प्रोफेशनल एंड पॉलिटिकल एक्युमेन.

यानी मंत्रियों के काम करने का जुनून, उनकी क्षमता, उनकी राजनीतिक समझ और प्रोफेशनल तरीके अपना कर प्रगति की राह पर आगे चलने का जो मंत्र मोदी ने दिया है, उस मंत्र को ही सभी मंत्रियों को अपनाना होगा, वरना उन छह मंत्रियों की तरह बाहर का रास्ता देखना होगा जिन्हें कैबिनेट विस्तार के वक्त बाहर कर दिया गया है.

चार पूर्व नौकरशाह बने मंत्री

सबसे पहले उन नौ नए मंत्रियों पर नजर डालें तो इनमें दो मंत्री पूर्व आईएएस अधिकारी, एम मंत्री पूर्व आईपीएस अधिकारी और एक मंत्री विदेश सेवा का पूर्व अधिकारी है.

इन चारों प्रोफेशनल लोगों को बाकी लोगों पर तरजीह दे दी गई है. लेकिन, जिन लोगों की छुट्टी हुई है, वे सभी बीजेपी के नेता हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है क्या मोदी का अपने नेताओं पर भरोसा नहीं रहा जो 4 पी के फॉर्मूले पर खरा उतर सकें. क्या इससे यह संदेश नहीं जाएगा कि अपनी पार्टी के लोगों में वो क्षमता नहीं है जो मोदी की रफ्तार से कदमताल कर सरकार को बेहतर ढंग से चला सकें.

ये चंद सवाल हैं जो जरूर पूछे जाएंगे. लेकिन, इन सवालों की फिक्र शायद प्रधानमंत्री मोदी को नहीं है. वरना, इस कदर रिटायर्ड नौकरशाहों पर भरोसा नहीं करते, उनमें भी दो तो इस वक्त किसी सदन के सदस्य भी नहीं हैं.

 

खैर इन बातों की परवाह मोदी को नहीं है, उन्हें विरोधियों के सवालों की फिक्र नहीं बस उन्हें परिणाम चाहिए. हर हाल में उन्हें बेहतर परिणाम चाहिए, इसीलिए आधार बनाया है 4 पी का.

नए मंत्रियों में चारों नौकरशाहों को बड़ा विभाग भी दिया गया है. बिहार के आरा से सासंद पूर्व गृह सचिव आर के सिंह को उर्जा मंत्रालय का बड़ा जिम्मा सौंपा गया है. जबकि, डीडीए के चेयरमैन रह चुके केरल कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी अल्फोंस कन्नकथन को स्वतंत्र प्रभार का पर्यटन राज्य मंत्री बनाया गया है. अल्फोंस के पास आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग में भी राज्य मंत्री का प्रभार रहेगा.

इसके अलावा पूर्व आईएफएस अधिकारी हरदीप सिंह पुरी को शहरी विकास और आवास मंत्रालय में स्वतंत्र प्रभार के राज्य मंत्री के तौर पर बड़ी जिम्मेदारी दी गई है. मुंबई पुलिस के पूर्व पुलिस कमिश्नर और बागपत से सासंद सत्यपाल सिंह को मानव संसाधन विकास मंत्रालय के साथ-साथ जल संसाधन और गंगा सफाई विभाग में राज्य मंत्री के तौर पर काम करने की जिम्मेदारी दी गई है.

निर्मला सीतारमण पर दिखाया भरोसा, गोयल को मिला प्रमोशन

इन नौ नए मंत्रियों के अलावा कैबिनेट में शामिल चार नए मंत्रियों पर सबकी नजर टिकी थीं. इन चार मंत्रियों में निर्मला सीतारमण ने बाजी मारी है. निर्मला सीतारमण को रक्षा मंत्रालय की अहम जिम्मेदारी दी गई है. इंदिरा गांधी के बाद निर्मला सीतारमण देश की दूसरी महिला रक्षा मंत्री हैं.

निर्मला सीतारमण अबतक केंद्र में बतौर वाणिज्य मंत्री काम कर रही थीं लेकिन, उनको तरक्की देकर रक्षा मंत्री बनाया जाना काफी अहम है. उनके अनुभव को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं. लेकिन, प्रधानमंत्री ने उनपर भरोसा दिखाया है.

सुरेश प्रभु की रेल मंत्री पद से विदाई पहले से तय थी. अब उनकी जगह तरक्की पाने वाले पीयूष गोयल को जिम्मेदारी दी गई है.

पीयूष गोयल बतौर उर्जा मंत्री बेहतर काम कर रहे थे. उनके काम का इनाम मिला है और उन्हें स्वतंत्र प्रभार के राज्य मंत्री से प्रोमोशन देकर कैबिनेट मंत्री भी बना दिया गया है. पीयूष गोयल पर प्रधानमंत्री मोदी ने बड़ा भरोसा दिखाया है.

42 साल बाद निर्मला सीतारमण के रूप में देश को दूसरी महिला रक्षा मंत्री मिली हैं। इससे पहले 1975 में इंदिरा गांधी (पीएम रहते हुए) डिफेंस मिनिस्टर थीं। 2019 के लोकसभा चुनाव के 20 महीने पहले मोदी कैबिनेट में फेरबदल किया गया। पीयूष गोयल को रेल मंत्री और सुरेश प्रभु को कॉमर्स एंड इंडस्ट्री का जिम्मा सौंपा गया.

बड़े फेरबदल

पीयूष गोयल के अलावा पेट्रोलियम राज्य मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को भी कैबिनेट बनाया गया है. प्रधान अब पेट्रोलियम मंत्रालय के साथ-साथ स्किल डेवेलपमेंट का भी काम संभालेंगे. प्रधानमंत्री ने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट रहे स्किल डेवेलपमेंट विभाग की जिम्मेदारी प्रधान को देकर बड़ा भरोसा दिखाया है.

इसके अलावा मुख्तार अब्बास नकवी को भी कैबिनेट मंत्री बना दिया गया है. हालाकि उनके पास पहले की ही तरह अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय ही रहेगा.

संसदीय कार्य मंत्री के तौर पर अनंत कुमार अपना काम करते रहेंगे. लेकिन, दोनों संसदीय कार्य राज्य मंत्रियों को बदल दिया गया है. मुख्तार अब्बास नकवी के कैबिनेट मंत्री बनने के बाद राज्यसभा सदस्य विजय गोयल को संसदीय कार्य राज्य मंत्री की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि अर्जुन राम मेघवाल दूसरे संसदीय कार्य राज्य मंत्री होंगे.

सरकार के एजेंडे में गंगा सफाई का अभियान सबसे ऊपर था, लेकिन, उमा भारती के मंत्री रहते इसमें कोई खास प्रगति देखने को नहीं मिला लिहाजा उनका मंत्रालय बदल दिया गया. सरकार में बेहतर काम करने वाले भूतल परिवहन मंत्री नीतिन गडकरी को उनके काम का ईनाम दिया गया है और अब उनके उपर गंगा सफाई की भी बड़ी जिम्मेदारी होगी.

मंत्रालय के बंटवारे से साफ है बदलाव बडा है और बड़े बदलाव की उम्मीद में ऐसा फेरबदल किया गया है. 2019 की लड़ाई से पहले किए गए इस बड़े बदलाव में काम को आधार बनाया गया है. बेहतर प्रदर्शन ही आगे मंत्रियों के काम के आकलन का आधार होगा. मोदी की तरफ से किए गए इस बदलाव में सबको एक नसीहत भी है और बड़ी चेतावनी भी, जिसे ध्यान में रखकर आगे काम करना होगा.

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