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क्या सच में चंद्रमा हमारे मन को कंट्रोल करता है?

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चंद्रमा पृथ्वी का एक मात्र उपग्रह है. चंद्रमा पृथ्वी से 405500 किलोमीटर दूर है. क्या आप जानते हैं कि इतनी दूर होने के बावजूद धरती पर ज्वार चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण के कारण आता है. कुछ लोग मानते हैं कि समुद्र का पानी खारा होना भी ज्वार और भाटा आने का एक कारण है. नदी में ज्वार नहीं आता है क्योंकि नदी का जल खारा नहीं होता है.

ज्योतिष के ग्रंथ कहते हैं की चंद्रमा के प्रभाव से ही इंसान के विचार का निर्धारण होता है. आज कल के मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि पूर्णिमा और अमावस्या के दिन आत्महत्या की घटनाएं ज्यादा देखने को मिलती है. आइए समझते है ऐसा क्यों होता है.

हमारे प्राचीन भारतीय समाज में चन्द्रमा को घड़ी की तरह इस्तेमाल किया जाता था. समुद्र किनारे रहने वाले मछुआरे पूर्णिमा और आमवस्या को समुद्र में नहीं उतरते थे. वे अपने अनुभवों से जान चुके थे कि पूर्णिमा और अमावस्या को समुद्र में ऊंची लहरें आती हैं.

एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि जो लोग अमावस्या या पूर्णिमा को जन्म लेते हैं, उनका मन दूसरे लोगों से ज्यादा चंचल रहता है. प्राचीन ज्योतिष ग्रंथ कहते है जिनका चंद्रमा कुंडली में ख़राब होता है उनको फैसले लेने में दिक्कत होती है.

चंद्रमा का सबके ऊपर अलग असर

चंद्रमा में गजब की गुरुत्वाकर्षण शक्ति है. पौराणिक मान्यताओं के हिसाब से हमारा शरीर भी पांच तत्वों से मिलकर बना है वायु, जल, आग, पृथ्वी और आकाश. ज्योतिष के हिसाब से इन तत्वों की कमी-बेसी के कारण चंद्रमा का प्रभाव उसके ऊपर अलग-अलग पड़ता है.

हमारे प्राचीन ग्रंथो में और आज का मेडिकल साइंस दोनों का मानना है की रात को जल्दी सोना और सुबह जल्दी उठना चाहिए. देर रात तक जागने पर चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण और बाकी वजहों से इंसान की बायलॉजिकल क्लॉक पर बुरा प्रभाव पड़ता है. आपको जान कर हैरानी होगी कि जो लोग पागलखानों में रहते है उनको अक्सर रात में दौरे पड़ते है. अंग्रेजी में पागलों के लिए ल्यूनेटिक्स शब्द का इस्तेमाल किया जाता है जो लूनर यानी चंद्रमा से ही बना है.

चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी जब एक सीध में आते हैं तो समुद्र में सबसे ऊंची लहरे आती है, इसके पीछे कारण यह है की चंद्रमा को सूर्य की गुरुत्वाकर्षण का बल भी मिल जाता है. ज्योतिष कहता है कि अगर कोई इंसान ऐसे समय में जन्म लेता है जब उच्च ज्वार आता है तो उसके पागल होने के कारण बाकी लोगों से ज्यादा होते हैं.

कुल मिलाकर इतनी बात है कि चांद सिर्फ हमारे कवियों की कल्पना का हिस्सा नहीं है. चांद की धरती से करीबी के चलते पृथ्वी पर इसका कुछ ज्यादा ही प्रभाव पड़ता है. अब अगर आप रात में देर तक जागते है तो इस आदत को बदल दीजिये और जल्दी सोने और जल्दी उठने की आदत डाल लीजिये.

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