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खरना या लोहंडा: चार दिवसीय चैत छठ पूजा का दूसरा दिन!

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छठ पर्व : वैसे तो छठ पर्व साल में दोबार मनाया जाता है एक बार यह हिंदी महीना के अनुसार चैत्र मास षष्ठी को और दूसरा कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी को मनाया जाता है। यह हिंदुयों का प्रमुख पर्व है। सूर्योपासना का यह अनुपम लोकपर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है। प्रायः हिन्दुओं द्वारा मनाये जाने वाले इस पर्व को इस्लाम सहित अन्य धर्मावलम्बी भी मनाते देखे गये हैं। धीरे-धीरे यह त्योहार प्रवासी भारतीयों के साथ-साथ विश्वभर में प्रचलित हो गया है।

इस चार दिवसीय पर्व के पहला दिन नहाय खाय के रूप में मनाया जाता है। इस दिन नहाय खाय कर छठ व्रती, व्रत के का संकल्प लेते हैं।इस पर्व के दूसरे दिन को खरना या लोहंडा के रूप में मनाया जाता है। इस दिन व्रतधारी दिनभर का उपवास रखने के बाद शाम को भोजन करते हैं। इसे ‘खरना या लोहंडा’ कहा जाता है। खरना का प्रसाद लेने के लिए आस-पास के सभी लोगों को निमंत्रित किया जाता है। प्रसाद के रूप में गन्ने के रस में बने हुए चावल की खीर के साथ दूध, चावल का पिट्ठा और घी चुपड़ी रोटी बनाई जाती है। इसमें नमक या चीनी का उपयोग नहीं किया जाता है। इस दौरान पूरे घर की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है।

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