THE INDIANS

ग्रेजुएशन के बाद ही डोली चढ़ती हैं बिहार के इस इलाके की बेटियां

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गांधी की कर्मभूमि और वाल्मीकि की तपोभूमि रहे बिहार के चम्पारण से बेटियों ने देश को बड़ा संदेश दिया है. संदेश है बाल विवाह जैसी कुरीति से लड़ने का और शिक्षा की ज्योति जलाने का.

चम्पारण के बगहा की बेटियों ने शपथ लिया है कि ग्रेजुएशन से पहले वो ससुराल नहीं जाएंगी यानी वो अपनी शादी कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद ही करेंगी. बाल विवाह की बेड़ियोंं को तोड़ कर बिहार के सबसे सुदूर इलाके से बेटियों ने उच्च शिक्षा के लिए मुहिम शुरू की है. ये इलाका थारू जनजाति बहुल है और थरूहट के नाम से जाना जाता है.

बेटियों ने शपथ ली है कि वे न तो बाल विवाह करेंगी और न ही ग्रेजुएशन से पहले शिक्षा से दूर होंगी. बेटियों के हौसले के आगे माता-पिता भी अब परिवर्तन की राह पर चल पड़े हैं. छात्रा राजनन्दनी, ममता, पम्मी जैसी कई बेटियां हैं, जिन्होंने अपने फैसले से समाज को नया कुछ करने की प्रेरणा दी है.

बेटियों ने जब सामाजिक परिवर्तन के लिए कदम बढ़ाया तो सरकारी मुलाजिमों से लेकर जनता के रहनुमाओं ने भी उनके कदम के साथ कदम मिला कर कदमताल शुरू कर दी है.  बाल संरक्षण आयोग बिहार की सदस्य अपर्णा सिंह बहुरानी, वाल्मीकिनगर से विधायक धीरेन्द्र प्रताप सिंह जैसे लोग भी बेटियों की इस मुहिम के साथ जुड़ रहे हैं.

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