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जिन्हें सपना देखना मना था, उन्हें IIT में भेज देते हैं आनंद, नए गरीब बच्चों को जल्द चुनेंगे

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“वो पथ क्या, वो पथिक कुशलता क्या , जिस पथ पे बिखरे शूल न हो , उस नाविक की धैर्य कुशलता क्या, जब धाराएं प्रतिकूल न हो.”

 यह पंक्ति उन कामयाब और मेहनती छात्रों को संबोधित करती है जो आज अपने सपनों को पूरी निष्ठा और धैर्य के साथ पूरा कर सफल हुए हैं. जब मेहनत इरादों के रथ पर सवार होकर अपने सफर पर चल पड़ती है तो लाख मुसीबतों के बाद भी सफलता कदम चूमने को बेकरार हो जाती है. चांदपुर बेला के सुपर 30 के आंगन में सपनों को घूमने की जितनी आज़ादी है,  उससे कहीं ज़्यादा उसे पूरा होने का एतबार भी.

आज सुपर-30 जैसे संस्थान गरीब बच्चों को अपने सपने साकार करने में बहुत बड़ी भूमिका निभा रहा, तभी तो बेरोजगार पिता का बेटा केवलिन हो, अंडे बेचने वाले का बेटा अरबाज आलम हो, खेतों में मजदूरी करने वाले का बेटा अर्जुन हो या फिर भूमिहीन किसान का बेटा अभिषेक. इन सभी ने घनघोर आर्थिक व सामाजिक पिछड़ेपन के काले बादलों का सीना चीरकर अपनी सफलता की रौशऩी से पूरे समाज को रौशन कर दिया है. जी हां, बच्चों ने सुपर 30 के आंगन में रहते-रहते आईआईटी का सफर पूरा कर लिया है.

केवलिन के पिता दीपक प्रसाद बेरोजगार हैं, पहले तो ये छोटे स्तर पर  पूजा -पाठ करते थे पर अब आलम ये है कि गुजर-बसर के लिए घर-घर घूमकर योगा सिखाते हैं, लेकिन हालत इतनी ख़राब है कि कभी कभी खाने के भी लाले पड़ जाते हैं. लेकिन दीपक जानते हैं कि इस गरीबी से निकलने का एकमात्र रास्ता है और वह है शिक्षा का. आई.आई. टी. के रिजल्ट में उनके बेटे का सफल होना उनके लिये भी एक बड़ी सफलता है. वे सुपर 30 के संस्थापक गणितज्ञ आनंद कुमार के बहुत आभारी हैं जिन्होंने उनके बेटे के सपनो को साकार करने में मदद की. उनकी खुशी का आसूं रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है.

वे बताते हैं कि मैंने आज से लगभग 10 साल पहले सुपर 30 का नाम सुना था और उसी दिन मैंने सपना देखा था कि एक दिन अवश्य ऐसा आएगा कि मेरा बेटा सुपर 30 में जायेगा और सफल होगा. और, आज यह सपना पूरा हो गया. केवलिन बताते हैं कि उन्हें सुपर-30 की जनकारी उनके पिताजी ने 8वीं कक्षा में दी थी फिर वे जाकर 10वीं में वहां दाखिला लिये.

उन्होंने कहा कि मुझे शुरुआत में थोड़ी दिक्कतें आती थी,चीजों को समझने में. पर,धीरे- धीरे आनंद सर के सहयोग से और हमारे साथियों की मदद से मैं आसानी से आगे बढ़ा. मैं आज के युवा से यही कहना चाहूँगा कि कड़ी मेहनत कभी बेकार नहीं जाती, हम किसी भी स्थिति में अपने सपनो को मेहनत से पूरा कर सकते हैं.

आनंद बताते हैं, कि सुपर 30 देखते-देखते 15वें वर्ष में पहुंच चुका है और अभी तक इस संस्था से कुल 396 बच्चों ने आईआईटी में प्रवेश पाया है. इस वर्ष आए परिणामों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए गणितज्ञ आनंद कुमार ने बताया कि यह बच्चों के निरंतर मेहनत का नतीजा है कि उन्होंने आईआईटी प्रवेश में सफलता हासिल की है. अब समय आ गया है जब सुपर 30 के आकार को बड़ा किया जाए. आनंद ने कहा कि वे देश के अलग-अलग हिस्सों में इसके लिए टेस्ट आयोजित करेंगे और इसकी जानकारी वेबसाइट पर दी जाएगी.

उल्लेखनीय है कि आनंद कुमार 15 वर्षों से मुफ्त में समाज के अतिवंचित तबके के 30 बच्चों को आईआईटी की तैयारी करवा रहे हैं. इस कार्य में उनका पूरा परिवार उनका साथ दे रहा है. उनकी मां स्वयं घर में सभी 30 बच्चों के लिए खाना बनाती हैं और आनंद व उनके भाई प्रणव कुमार बच्चों की आईआईटी की तैयारी करवाते हैं. इसके लिए आनंद कुमार देश के साथ-साथ विदेशों में भी मशहूर हो चुके हैं.

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यह आर्टिकल समीक्षा सोनी ने की है, अगर आप भी बिहार से जुड़े लेख, कविता, कहानी आदि हमें भेजना चाहते हैं तो यहाँ-  क्लिक करें  

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