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नीतीश का PM मोदी से सवाल, नोटबंदी के 77 दिन बीते अब तो फायदे बताये केंद्र

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मुख्यमंत्री  नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नोटबंदी के  अच्छे परिणामों को बताने की अपील की है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने  50 दिनों का समय मांगा था. आज 77 दिन बीत गये. नोटबंदी के जो भी अच्छे  परिणाम आये हैं, अब तो उन्हें बताना चाहिए.  कितना धन आया? इसमें कितना काला  धन था? सभी इसका इंतजार कर रहे हैं. संसद का बजट सत्र आ रहा है. इस पर  चर्चा होनी चाहिए. साथ ही नोटबंदी से जिन गरीबों और असंगठित मजदूरों का  रोजगार छिन गया, उन्हें क्षतिपूर्ति दी जाये. मुख्यमंत्री मंगलवार को  श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित कर्पूरी ठाकुर जयंती समारोह  में बोल रहे थे.

जदयू के अतिपिछड़ा प्रकोष्ठ की ओर से इस समारोह में  मुख्यमंत्री ने कहा कि  नोटबंदी बड़ा कदम था. जदयू ने सैद्धांतिक समर्थन दिया था. लगा था इरादे ठीक हैं. काला धन-भ्रष्टाचार खत्म होगा,  लेकिन नोटबंदी की तैयारी पूरी नहीं थी. इससे लोगों को  कठिनाइयां हुईं. बहुत काम बंद हो गये. लोगों को संतोष था कि थोड़ी परेशानी  हो रही है, लेकिन दो नंबर वालों का काला धन तो बाहर आ रहा  है. सीएम Âबाकी पेज 19 पर
नोटबंदी के 77 िदन बीते अब ने कहा कि कैश के रूप में काला धन बहुत कम है. अब  बेनामी  संपत्ति, हीरा, सोना, रियल इस्टेट, शेयर और विदेशों में निवेश पर चोट करनी चाहिए.
समान नागरिक संहिता के लिए पहले चर्चा करें केंद्र 
नीतीश  कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार समान नागरिक संहिता के लिए पहले सभी  संप्रदायों से बात करे, सही से राय ले. इसका क्या प्रारूप होगा और क्या   प्रस्ताव है, यह बताये. इसके बाद इस पर संसद व विभिन्न क्षेत्रों में बहस  हो. तब जाकर जो निष्कर्ष निकलता है, वैसा किया जाये. मुख्यमंत्री ने कहा कि  इस पर बिहार सरकार ने कैबिनेट की सहमति के बाद अपनी राय से केंद्र को अवगत करा दिया है. अब जदयू एक-दो दिनों में अपना स्टैंड साफ कर देगा.  सीएम ने कहा कि समान संहिता के लिए केंद्र ने प्रश्नावली भेजी थी.  क्या किसी राज्य सरकार को प्रश्नावली भेजी जाती है? लग रहा है कि किसी  नौकरी की परीक्षा में बैठे हैं, क्या यही तरीका है? समाज में विभिन्न भाषा,  संप्रदाय के लोग रहते हैं. देश की इस खासियत को नष्ट करने की कोशिश नहीं  की जाये.
बड़का नेता समर्थन करते हैं, छोटका कुछ-न-कुछ बोलते रहते हैं
सीएम ने भाजपा पर भी जम कर निशाना साधा. उन्होंने पूर्व उपमुख्यमंत्री  सुशील मोदी का नाम लिये बगैर कहा कि भाजपा के बड़का नेता (पीएम  नरेंद्र मोदी) बिहार में शराबबंदी का समर्थन करके गये, लेकिन यहां छोटका  नेता कुछ-न-कुछ बोलते रहते हैं. उनका जवाब देने के लिए हमारे मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह लगे हुए हैं. वह कहते हैं कि मानव शृंखला में बच्चों को  लगाया गया.बच्चों में ही जनचेतना जागृत होती है और सीखने की उम्र बच्चे  की ही होती है. हमलोग या जो ऐसा बयान दे रहे हैं, वे बचपन या छात्र जीवन  में नहीं सीखते, तो न तो लोग उनकी बात सुनते और न ही अखबारों में जगह  मिलती. मुख्यमंत्री ने भाजपा से पूछा है कि वे क्यों बच्चों को शाखा से  जोड़ते हैं? शाखा में बच्चा जाये, तो ठीक, लेकिन शराबबंदी के पक्ष में  बच्चा आये, तो कलेजा फट रहा है. ऐसी दोहरी मानसिकता सही नहीं है. अब जब  स्कूलों में भूकंप से बचाव के उपाये बच्चों को बताये जाते हैं, तो वे अपने  माता-पिता को इसकी जानकारी देते हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री से  आग्रह है कि जिस शराबबंदी का वे समर्थन करके गये और जो गुजरात में पहले से  लागू है, उसे भाजपा शासित सभी राज्यों में लागू कर अपनी पार्टी के वैसे  नेता, जिनका मन नहीं मान रहा है, उन्हें जवाब दें.
शराबबंदी कर कर्पूरी के अधूरे सपने को कर रहे साकार 
सीएम  ने कहा कि बिहार में पूर्ण शराबबंदी कर हम जननायक कर्पूरी ठाकुर के अधूरे  सपने को पूरा कर रहे हैं. कर्पूरी ठाकुर ने भी शराबबंदी लागू की थी, लेकिन  उनके हटते ही उसे वापस ले लिया गया था. अब यह खत्म नहीं होनेवाला है. हमलोग  और राज्य की जनता इसे टाइट करेगी. शराबबंदी के बाद में बिहार को नशामुक्त  करना है. शराब छोड़ कर कोई गांजा, अफीम, चरस या दूसरे पदार्थों की लत में  तो नहीं पड़ रहा है, इसे जनता को भी देखना चाहिए. उन्होंने कहा कि कहीं से  शराब पकड़ी जाती है, तो कुछ लोग कहते हैं कि शराबबंदी कानून फेल है. अरे,  हत्या के लिए उम्रकैद व फांसी होती है, लेकिन क्या हत्या रुकी? ऐसे में  क्या कोई कहता है कि कानून हटा दिया जाये. अगर कोई दो नंबर के रास्ते शराब  लाता है, गड़बड़ करता है, तो उसे बख्शा नहीं जायेगा. यहां कोई मुरव्वत नहीं  होनेवाली है. पकड़े जाने पर छोड़ा नहीं जायेगा.
 
मानव शृंखला में चार करोड़ हुए शामिल
सीएम  ने कहा कि 21 जनवरी को नशामुक्ति के पक्ष में विश्व रिकॉर्ड मानव श्रृंखला  बनी. इसमें तीन करोड़ नहीं, करीब चार करोड़ लोग शामिल हुए. एक लाइन लगनी  थी, लेकिन दो-तीन-चार लाइनें लगीं. कई जगहों पर सड़क  जम हो गयी. कई ऐसी  सड़कें, जहां रूट नहीं थी, वहां भी लोग कतार लगाये खड़े थे. इसमें भी कुछ  लोग मीन मेख निकाल रहे हैं. लोगों को बरदाश्त नहीं हो रहा है. सामाजिक  परिवर्तन की बुनियाद बन गयी है. परिवर्तन की हवा चल रही है. घर-घर से आवाज आ  रही है. कोई चाह कर भी अड़ंगा लगायेगा, तो इसमें सफल नहीं होगा.
थक हार कर भाजपा ने किया आत्मसमर्पण
 
नीतीश  कुमार ने कहा कि अब भाजपा भी कर्पूरी ठाकुर की जयंती मना रही. इस पर मुझे  खुशी होती है कि थक हार कर भाजपा ने आत्मसमर्पण कर दिया. आरक्षण लागू करते  समय वे विरोध कर रहे थे, लेकिन अब उन्हें मान रहे हैं. कंठ से ही सही,  उन्हें याद करना पड़ रहा है. कर्पूरी व भाजपा के विचार में कोई तालमेल नहीं  है. हमलोग गांधी, कर्पूरी, जेपी, लोहिया के आदर्शों को माननेवाले हैं.  राज्य में पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को 50% आरक्षण दिया. राज्य की  न्यायिक सेवा में आरक्षण दिया है.
चुनाव में पैसा लगाने की न बचे गुंजाइश 
मुख्यमंत्री  ने कहा कि चुनाव आयोग ऐसा करे कि चुनाव में लोगों को पैसा लगाने की  गुंजाइश न बचे. अगर कोई चुनाव लड़ने में पैसा देता है, तो वह बाद में उसे  वसूलना चाहेगा. इससे भ्रष्टाचार और बढ़ता है. चुनाव सुधार के लिए व्यापक  प्रस्ताव होना चाहिए. जिस भी दल को कोई चंदा देता है, तो वह पारदर्शी होना  चाहिए. सभी के लिए ‘प्लेइंग लेवल फील्ड’ होनी चाहिए और समाज को बेहतर बनाने  की दिशा में काम होना चाहिए.
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