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पटना : 97 की उम्र में स्टूडेंट बने ‘दादा जी’ फिर लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में बनायी जगह

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नाम राजकुमार वैश्य, उम्र 97 साल लेकिन जज्बा ऐसा कि लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में इस बुजुर्ग ने अपना नाम दर्ज करा डाला.

हम बात कर रहे हैं पटना के एक बुजुर्ग विद्यार्थी राजकुमार वैश्य की जिन्होंने अपने अनोखे जज्बे और पढ़ाई के प्रति रूझान से रिकॉर्ड बुक में अपना नाम दर्ज कराया.

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आम तौर पर 97 साल की उम्र में लोग आराम करते हैं और ये उम्र जीवन के अंतिम पड़ाव के तौर पर जाना जाता है लेकिन 97 साल के स्टूडेंट यानि राजकुमार आज भी 4 से 5 घंटे की पढाई करते हैं. बिहार के नालंदा ओपन विश्वविद्यालय से ये बुजुर्ग अर्थशास्त्र में पीजी की पढ़ाई कर रहा है वो भी अंग्रेजी मीडियम में.

इस उम्र में अपने इसी अनोखी शुरूआत के कारण उन्होंने एक नेशनल रिकॉर्ड कायम कर दिया है. राजकुमार वैश्य को नौकरी से रिटायर हुए 37 साल हो गए हैं. रिटायरमेंट से पहले वो एक प्राइवेट कंपनी में साधारण सी नौकरी किया करते थे.

समय बीतता गया और उनकी उम्र ढलती गई और फिर एक वक्त ऐसा भी आया जब उन्होंने फिर से पढ़ाई करने की ठान ली. राजकुमार के बेटे संतोष ने बताया कि 2014 में उनकी तबियत बहुत बिगड़ गई. तब परिवार के लोगों ने उनके जिंदा रहने की उम्मीदें तक छोड़ दीं तभी एक करिश्मा हुआ और राजकुमार बच गए.

बहू भारती के मुताबिक शायद भगवान को भी कुछ और हीं मंजूर था जिसके बाद करिश्मे ने राजकुमार को शिखर तक पहुंचा दिया. अपनी इस मेहनत और लगन से वो खुद खुश हैं तो उनका परिवार भी इस रिकॉर्ड से गदगद है.

राजकुमार ने 97 की उम्र में पढ़ाई कर जहां एक तरफ नेशनल रिकार्ड बनाया है तो वहीं दूसरी ओर उनके फॉलोअर भी तैयार हो गए हैं. आस पड़ोस के अधिकांश लोग उन्हें दादा जी ही कहते हैं. पड़ोंस में ही रहने वाले विंदेश्वर के लिए तो ये  दादा जी प्रेरणास्त्रोत बन गए हैंं.

उन्हें देख अब इन जनाब ने भी फिर से पढ़ाई शुरू कर दी है. राजकुमार के इस जज्बे से  नालंदा ओपेन यूनिवर्सिटी के रजिस्टार एसपी सिन्हा भी उत्साहित हैं. रजिस्ट्रार के मुताबिक ये पूरे बिहार के लिये भी गौरव की बात है कि 97 साल की उम्र में पीजी की पढ़ाई करने के लिये किसी बुजुर्ग ने दाखिला लिया है.

न्यूज 18 को राजकुमार ने बताया कि लोग अपने आप को बिजी रखने के लिये अखबार पढ़ते हैं, टीवी देखते हैं लेकिन मैंने पढाई का रास्ता चुना ताकि मैं शारीरिक और एकेडमिक दोनों तौर पर जीवित रहूं.

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