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पढ़ें… क्यों पटना को शहर नहीं बल्कि एक बड़ा गांव मानते हैं सीएम नीतीश

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बिहार के मुख्यंमत्री नीतीश कुमार ने द एसाेसिएशन ऑफ जियोग्राफर्स बिहार-झारखंड के दाे दिवसीय 19वें वार्षिक सम्मेलन सह राष्ट्रीय सेमिनार का पटना के सम्राट अशाेक कन्वेंशन केंद्र स्थित ज्ञान भवन में द्वीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया. पटना के एएन कॉलेज के स्नातकाेत्तर जियाेग्राफी विभाग द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय सेमिनार में अर्बन डॉयनेमिक्स एंड स्मार्ट सिटी प्रास्पेक्ट इन बिहार एंड झारखंड विषय पर चर्चा हाे रही है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस अवसर पर अपने संबाेधन में सबसे पहले आयाेजन के लिए सभी लाेगाें काे शुभकामनायें दी. इस दौरान उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि पटना काेई शहर नहीं बल्कि एक बड़ा गांव है.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि इन दाे दिनाें में अर्बनाइजेशन पर चर्चा हाेनी है, लेकिन भूगाेलवेताआें से मेरा ये सुझाव है कि इसके अलावा हमें इस पृथ्वी के बारे में सोचना चाहिए, जिससे हमारा भविष्य ठीक हाे. जहां तक शहरीकरण की बात है, यह सही है कि कुछ प्लांड सिटी बने हैं, जैसे टाटा ने जमशेदपुर बनाया, बोकाराे स्टील सिटी बना, ये ताे बहुत सुंदर हैं, लेकिन इसके बाहर की क्या स्थिति है?

सीएम ने कहा कि छात्र जीवन में जमशेदपुर शहर देखने का माैका मिला. प्लांड सिटी 20 किमी बहुत सुंदर लगा, लेकिन बाहर की हालत अच्छी नहीं थी. मुंबई आर्थिक राजधानी है, लेकिन आज उसकी क्या स्थिति है. चीन के शहर बीजिंग जाने का भी माैका मिला है, वहां मैं पक्षियों की चहचहाहट सुनने काे तरस गया. उन्हाेंने भूगाेलवेताआें से कहा कि बड़े-बड़े शहराें के लिए भी प्राकृतिक वातावरण का कितना महत्व है इसलिए पृथ्वी पर बात कीजिए. प्रकृति के नियम के खिलाफ हमें नहीं चलना चाहिए. पृथ्वी काे विनष्ट हाेने से बचाना हमारा दायित्व है. आज तकनीक के विकास का दुरूपयाेग भी एक बड़ा कारण बन रहा है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरा मानना है कि पटना काेई शहर नहीं बल्कि एक बड़ा गांव है. बिहार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं मानी जाती, लेकिन छह कराेड़ लाेगाें के पास माेबाइल फोन हैं. अब ताे लाेग माेबाइल से वॉयस आैर वीडियो कॉल करने लगे हैं. 1996 तक वातानुकूलित कमरे बहुत कम हुआ करते थे. हमने जब गांव-गांव में बिजली पहुंचायी ताे अब गांवों में भी फ्रीज, टीवी आैर एयरकंडिशनर लग गये. प्रकृति से छेड़छाड़ कर हम आनंद का अनुभव ताे कर रहे हैं, लेकिन इसके कई दुष्प्रभाव देखने काे मिल रहे हैं.

सीएम नीतीश ने कहा कि महात्मा गांधी जी ने कहा था कि पृथ्वी हमारी जरूरताें काे पूरा कर सकती है, हमारे लालच काे नहीं. यहॉ थर्मल पॉवर प्लांट स्थापित करने के लिए काेयले की जरुरत है, लेकिन यह धरती की खुदाई से ही संभव है. विकास के लिए पेड़ों की कटाई अंधाधुंध जारी है इसलिए, इस तरह एकेडमिक बहस से बुहत कुछ नहीं हाेगा, इसके लिए लाेगाें की सोच काे बदलना पड़ेगा, खुद काे उसके अनुरूप ढालना हाेगा. मुख्यमंत्री आवास में अक्सर टहलता हूं ताे देखता हूं कि काम करने वाले श्रमिक पानी पीकर बोतल काे इधर-उधर फेंक देते हैं, मैं उसे खुद उठाकर रख देता हूं ताकि इसका उन पर असर पड़े.

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे यहां सूर्य की पूजा हाेती है, जिसकी परिक्रमा हमारी पृथ्वी करती है. पृथ्वी घूम रही है, लेकिन हमें एहसास नहीं हाेता है. कुदरत ने इतनी ताकत दी है कि हमलाेग अपने सारे कार्यक्रम आसानी से करते हैं. सूर्योपासना का पर्व छठ में दाे दिनाें तक पटना सहित पूरे बिहार के तमाम कसबे में कहीं भी आपकाे किसी तरह का कचरा नहीं दिखेगा, लेकिन दाे दिनाें के बाद स्थिति देखिए, घर के बाहर लोग कचरा फेंक देते हैं. हालांकि वही वापस लौटकर उनके घर आता है.

नीतीश कुमार ने कहा कि हमारी योजना लाेगाें की मूलभूत जरुरत काे पूरा करती है. उन्हाेंने कहा कि हमलाेग ‘सात निश्चय’ पर काम कर रहे हैं, जिससे जरुरत की सारी चीजें बिजली, पानी, रास्ते गांवाें में उपलब्ध हाे जायेंगे. सब चीजाें पर काम हुआ है, पुल-पुलिया, सड़क पर काम हुआ है. अब गांवाें के विकास के बारे में हमारी याेजना है. आज भी विधायकाें, सांसदाें से प्राथमिक मांग गांव की नली-गली-पानी-बिजली रहती है. हमलाेगाें ने साेचा कि इन समस्याआें से निदान दिलाया जाए. गांवाें, टाेलाें काे शहर की मुख्य सड़कों से जाेड़ने का काम जारी है. हमारा विकास विकेंद्रीकरण के माध्यम से हाेता है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि गांव हाे या शहर सभी जगह इसकाे विकेंद्रीकृत तरीके से लागू कर रहे हैं, इसके लिये ग्राम पंचायताें आैर नगर निकायाें के माध्यम से सात निश्चय की योजनायें क्रियान्वित हाे रही है. उन्होंने कहा कि बिहार के पानी में क्षेत्रवार आसेर्निक, फ्लाेराइड आैर आयरन की मात्र है, बिहार के उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में आयरनयुक्त पानी है. आर्सेनिक, फ्लोराइड आैर आयरनयुक्त पानी से छुटकारा पाने के लिये कई गांवाें का प्राेजेक्ट बनाना हाेता है, एेसे स्थानाें पर जहां पानी में गुणवता की समस्या है, वह कार्य विकेन्द्रीकृत तरीके से नहीं बल्कि लाेक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा केन्द्रीकृत तरीके से कराया जायेगा.

गांवों में जब लोगाें काे नल का पानी मिलता है ताे यह देखकर प्रसन्नता हाेती है. हम काम करने में विश्वास करते हैं प्रचार में नहीं. शुद्ध पानी, अनवरत बिजली, निकलिए ताे पक्की सड़कें, हमारे गांव के लाेगाें काे सुखद आनंद के लिए एक अच्छी सुविधा हाेगी. सींचेवाल साहब ने पंजाब में अच्छा काम किया है. हमारे पूर्व मुख्य सचिव कंग साहब ने सींचेवाला से मिलवाया. पानी के सदुपयोग के लिए अधिकारियों के दल के साथ पंजाब जाकर मैंने इसे देखा आैर उसे लागू करने के लिए कहा. उन्हाेंने निर्देश दिया है कि सीवरेज ट्रिटेड पानी भी गंगा में नहीं बहाया जायेगा, वह अब खेती के काम में उपयोग में लाया जायेगा. हमारे यहां अॉगेर्निक खेती काे बढ़ावा दिया जा रहा है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने सड़काें का चौड़ीकरण करवाया, फ्लाई आेवर बनवाया. आज पटना के कंकड़बाग में आना-जाना कितना आसान हाे गया, पहले दिन भर का समय एक जगह से दूसरे जगह पहुंचने में लग जाया करता था. उन्हाेंने कहा कि सड़क के साथ-साथ गाड़ियाें की संख्या में काफी वृद्धि हुई है, जिससे आवागमन की समस्या बनी रहती है. उन्होंने कहा कि ठाेस कचरा प्लान काे समझना हाेगा, खुद जनता इसे समझे आैर जन सहयाेग से कचरा प्रबंधन किया जा सकता है.

नीतीश कुमार ने कहा, महात्मा गांधी जी द्वारा सौ साल पहले चंपारण में बनाये गये स्कूल में मैं गया था, जिसमें उस समय सफाई के बारे में उन्हाेंने जानकारी दी थी. कुदरत की महता काे, ताकत काे समझिए जरूरत भर ही उपयाेग कीजिए. अभी हमारे यहां जाे बाढ़ आयी थी वो नब्बे वर्ष के लाेग भी कहते हैं कि एेसी बाढ़ हमने अपने जीवन में पहली बार देखी है, आखिर क्या कारण है? प्रकृति का दाेहन, हमें साेचना हाेगा.

मुख्यमंत्री ने कहा कि किरासन तेल के कम उपयोग के बारे में केंद्रीय मंत्री से चर्चा हुई, जिसमें हमने सहयाेग देने का आश्वासन दिया. हमारे यहां बिजली आैर एलपीजी कनेक्शन लाेगाें के पास उपलब्ध है. आत्मचिंतन का दौर चलाइये, हमारे यहां आर्यभट्ट नॉलेज सेंटर में रीवर सिस्टम पर काम हाे रहा है. उन्हाेंने कहा कि आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय में सेंटर ऑफ जियोग्राफी भी खाेलने पर विचार किया जा सकता है.

सीएम ने कहा कि अर्बेनाइजेशन का मतलब पर्यावरण की सुरक्षा एवं सामाजिक परिवेश का विकास है. बिहार में 88 फीसदी लाेग गांवाें में निवास करते हैं, जिसमें 76 फीसदी लोग कृषि कार्य में लगे हुए हैं. हमने उद्याेगाें के विकास के लिए काफी प्रपोजल दिये, हमारा प्रयास खेताें में काम करने वाले लोगाें की आमदनी काे बढ़ाना है, इसके लिए एग्रीकल्चर राेड मैप बनाया गया है. फूड प्रोसेसिंग में काफी संभावनाएं हैं, हमारे पास समतल मैदान हैं, गंगा की निर्मलता है, इसके लिए अविरलता की जरुरत है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहारी लोग राेजगार की तलाश में कहां नहीं जाते हैं, लोग अब चेन्नई भी पहुंच गये हैं. पंजाब की खेती आैर दिल्ली की दिनचर्या बिहारी पर ही चलती है. पूरे मॉरीशस का 70 प्रतिशत हिस्सा भारतीय है आैर उसमें 51 प्रतिशत बिहारी हैं. हमारे लोग घूमने की प्रवृति में विश्वास करते हैं, बाहर जाकर अपनी आमदनी बढ़ाते हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि असंतुलित शहरीकरण का ये आलम है कि पटना से लेकर बिहटा तक काेई जमीन देने काे तैयार नहीं थे, लेकिन जैसे ही बिहटा आईटी हब बनने की बात आयी ताे जमीनाें की कीमतें आसमान छूने लगीं आैर बेतरतीब तरीके से लोग मकान बना लिए.

नीतीश कुमार ने आयोजकाें से कहा कि आपने बुलाया, इसके लिए बहुत-बहुत आभार. हमलाेग आपकी बात सुनकर जनता से इनटरैक्ट करते हैं. सोशल रिफॉमर्स यथा- शराबबंदी, दहेज प्रथा, बाल विवाह पर काम किया जा रहा है. जब बिहार आैर झारखंड बंटा, उस समय हमारे लोग निराश थे. आज हमारी प्रगति से लाेग संतुष्ट हैं. उन्हाेंने कहा कि झारखंड के पास पेड़, पहाड़ है ताे हमारे पास समतल जमीन आैर नदी हैं. दाेनाें के एेतिहासिक संबंध एक हैं. दोनाें अपने-अपने तरीके से देश के विकास में याेगदान दे रहे हैं.

सीएम ने कहा, बिहार-झारखंड के भूगाेलशास्त्री एक मंच पर चिंतन के लिए उपस्थित हुए हैं, इनसे आग्रह है कि पर्यावरण के प्रति जागरुकता के लिए कुछ एेसा संदेश दें आैर ऐसी चीज साेचें जाे जनता काे जागरूक कर सके. भूगाेलविदाें के इस दाे दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एजीबीजे का साेवेनियर आैर जर्नल का भी विमाेचन किया. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बिहार विभूति श्री अनुग्रह नारायण सिंह के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की. कार्यक्रम काे मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, पटना विश्वविद्यालय के कुलपति रास बिहारी सिंह, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की भूगाेल विभाग की प्राे. (श्रीमती) आभा लक्ष्मी सिंह, मगध विष्वविद्यालय के प्रतिकुलपति प्रो. केएन पासवान, द एसोसिएशन ऑफ जियाेग्राफर्स बिहार एंड झारखंड के प्रेसिडेंट प्रो. श्री टुनटुन झा, पटना विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं मुख्य संरक्षक एसोसिएशन ऑफ बिहार-झारखंड प्रो. एलएन राम, एएन कॉलेज के प्राचार्य एसपी शाही ने भी संबाेधित किया.

धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम की संयाेजिका प्रो. (श्रीमती) पूर्णिमा शेखर सिंह ने किया. इस अवसर पर मुख्यंमत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा, बिहार-झारखंड के विद्वान भूगाेलवेतागण, विशिष्ट अतिथिगण, गणमान्य व्यक्ति एवं रिसर्च स्कॉलर माैजूद थे.

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