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प्रकाशोत्सव: लंगर में मिलेंगे मशीन के बने रसगुल्ले और रोटियां

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​प्रकाशोत्सव के दौरान हरिमंदिर साहिब गुरुद्वारा में श्रद्धालु मशीन के बने रसगुल्ले और रोटियां खाएंगे। इसके लिए पंजाब के मोगा जिला के बद्री गांव से मशीनें मंगाई गई है। वहां के संत महेशमणि गोरेवाले बाबा की तरफ से यह मशीनें प्रकाशोत्सव के दौरान पटनासाहिब को मदद के लिए भेजी गई हैं।

रसगुल्ला बनाने वाली मशीन को चालू भी कर दिया गया है। सोमवार को लंगर छकने पहुंचे कई श्रद्धालुओं ने मशीन से बने हुए लजीज रसगुल्ले का स्वाद चखा। जबकि रोटी सेंकने वाली मशीन मंगलवार तक पूरी गति से रोटियां बनाना शुरू कर देगा। प्रकाशोत्सव के बाद मशीन वापस मूल गुरुद्वारा चला जाएगा। लांगरी लोग भी पंजाब से आए हैं।

एक घंटे में 12 हजार रसगुल्ला

मशीन के साथ पटना पहुंचे जगजीत सिंह ने बताया कि रसगुल्ला बनाने वाली मशीन एक मिनट में 210 रसगुल्ला बनाने की क्षमता है। इस तरह एक घंटे में 12 हजार 620 रसगुल्ला तैयार हो सकता है। लंगर में श्रद्धालुओं की जरुरतों के अनुसार रसगुल्ला को तैयार किया जा सकता है। इसके अलावा अन्य जगहों पर संचालित होने वाले लंगरों में भी जरुरत पड़ने पर रसगुल्ला की आपूर्ति हो सकती है।

रोटी मशीन से राहत

रोटी बनाने की मशीन मंगलवार से चालू हो सकती है। मशीन को पटनासाहिब गुरुद्वारा के लंगर में लगा दिया गया है। इसका ट्रायल पहले ही हो चुका है। मशीन के साथ आने वाले कारीगरों की मानें तो मशीन प्रत्येक घंटे एक हजार से ज्यादा रोटियां बना सकती है। लंगर की भीड़ को संभालने के लिए इस मशीन से काफी राहत मिलेगी। मशीन पर सेवा साध संगत, सिंह सभा गुरुद्वारा बेरुत(लेबनान)लिखा हुआ है। स्थानीय लोगों ने बताया कि मशीन लेबनान के संगत के द्वारा पंजाब स्थित गुरुद्वारा को मुहैया कराया गया था, जो बाद में पटना साहिब प्रकाशोत्सव को देखते हुए भेजा गया है।

खोआ और गूंथा आटा भी

गुलाब जामुन और रोटी बनाने वाली मशीन के अलावा आटा गूंथने और खोआ बनाने की मशीन भी पटना साहिब गुरुद्वारा में आयी है। इससे रोटी के लिए आटा गूंथने और रसगुल्ला बनाने के लिए खोआ बनाने की दिक्कत भी नहीं होगी।

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