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प्रकाश पर्व का समापन होगा भव्य, 23 से 25 दिसंबर तक चलने वाले कार्यक्रमों के लिए ये रहेगी तैयार

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गुरु गोविंद सिंह महाराज के 350वें प्रकाश पर्व के समापन (351वें प्रकाशोत्सव) समारोह को भी भव्य बनाने के लिए राज्य सरकार ने कमर कस ली है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को करीब दो घंटे पटना सिटी में रहकर 23 से 25 दिसंबर तक होने वाले इस समारोह की तैयारियों का जायजा लिया और संबंधित स्थलों बाइपास स्थित टेंट सिटी, कंगन घाट और तख्त श्री हरिमंदिर साहिब का निरीक्षण किया।


उन्होंने अधिकारियों को कई अहम निर्देश भी दिए।
तीनों स्थलों का जायजा लेने के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकाश पर्व के आयोजन से पूरी दुनिया में बिहार की प्रशंसा हुई। अब समापन समारोह भी उतना ही भव्य होगा। उम्मीद है इसमें और बड़ी संख्या में सिख श्रद्धालु पहुंचेंगे और यहां से संदेश लेकर जाएंगे। इसे देखते हुए सरकार के सभी विभागों द्वारा इंतजाम किया जा रहा है, ताकि लंगर की पर्याप्त व्यवस्था हो, आवागमन में कोई असुविधा न हो। सीएम ने कहा कि पिछली बार की तरह ही यह धार्मिक आयोजन गुरुद्वारा कमेटी द्वारा होगा, राज्य सरकार तमाम सुविधाएं मुहैया कराएगी।
ये तैयारी हो रही है : बाइपास टेंट सिटी में 35 हजार तथा कंगन घाट टेंट सिटी में पांच हजार लोगों के रहने की व्यवस्था की जा रही है। दोनों जगह क्रमश: पांच और तीन लंगर हॉल बनाए जाएंगे।
नक्शा देखा, खेत-बधार और गंगा घाट भी घूमे
मुख्यमंत्री ने बाईपास टेंट सिटी से निरीक्षण की शुरुआत की। डीएम, कमिश्नर नक्शा लेकर एक-एक निर्माण के बारे में सीएम को बताते रहे। एक फटी बांस देख सीएम नाराज हुए और टेंट सिटी में बेहतरीन मैटेरियल इस्तेमाल करने को कहा। मच्छर से बचाव के लिए नेट लगाने को कहा। कंगनघाट पहुंच घुड़दौड़, टेंट सिटी और लंगर की व्यवस्था देखी। टॉयलेट, वेंटिलेशन का प्रबंध करने को कहा। श्रद्धालुओं को आने-जाने में परेशानी न हो, इसलिए रास्ते की दूरी कम रखने और गांधी मैदान जैसा पंडाल व संगत हाल बनाने का भी निर्देश दिया।
पिछली बार समाज के हर वर्ग के लोगों ने देशभर से आए सिख श्रद्धालुओं को बहुत सम्मान दिया, इससे उनके मन में एक अच्छी भावना पैदा हुई है बिहार के प्रति। हम आग्रह करेंगे बिहारवासियों से, पटनावासियों से कि जिस तरह पिछली बार प्रकाश पर्व पर सहयोग किया और जो श्रद्धालु आये उनकी सेवा में तत्पर रहे, इस बार भी वही व्यवहार होना चाहिए। यह गौरव की बात है कि गुरु गोविन्द सिंह जी महाराज का जन्म यहीं हुआ था।

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