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बच्चों के लिए एक मंच पर आए धर्म गुरु, ‘बिहार इन्टर फेथ फोरम फॉर चिल्ड्रेन’ का किया गठन

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ऐसा पहली बार हुआ है जब बिहार में बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए धर्म गुरु चिंतन करते नजर आए. बाल अधिकार और बच्चों की बेहतरी के लिए सभी धर्मगुरु एक मंच पर दिखे. सभी ने बच्चों के विकास, सुरक्षा, भागीदारी, शिक्षा और स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए कार्य करने का संकल्प लिया.

यूनिसेफ बिहार कार्यालय में शुक्रवार को मुख्य धर्म गुरुओं एवं धार्मिक संगठनों के साथ एक परामर्शी बैठक का आयोजन किया गया था. इसमें आचार्य सुदर्शन जी महाराज, आचार्य किशोर कुणाल, मशाल की सिस्टर ज्योतिषा, सेवा केंद्र के फादर अमल राज, सैयद शमीम अहमद सहित अन्य धर्म गुरुओं ने हिस्सा लिया.

सभी ने एक मत से ‘बिहार इन्टर फेथ फोरम फॉर चिल्ड्रेन’ का गठन किया. महावीर न्याय समिति के चेयरमैन किशोर कुणाल ने बताया कि गरीबी समाज की सभी समस्याओं की जड़ है. उन्होंने सरकार और गैर सरकारी संगठनों से अनुरोध किया वे गरीब परिवार के बच्चों के इलाज के लिए आगे आए और उन्हें मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराए.

आत्म कल्याण केंद्र के संस्थापक आचार्य सुदर्शन महाराज ने बच्चों के विकास के लिए विद्यालयों को तनाव मुक्त और बच्चों के अनुकूल बनाने पर जोर दिया. यूनिसेफ बिहार के प्रमुख असदुर रहमान ने कहा कि बच्चों के टीकाकरण और शिशु मृत्यु दर और नवजात शिशु दर में कमी आई है.

खानकाह मुनेमिया के सैयद शाह शमिमुद्दीन ने यूनिसेफ के इस पहल का स्वागत करते हुए बताया कि मुस्लिम समाज बाकी सभी समुदाय से पीछे है इसीलिए मुस्लिम धर्म गुरुओं की जिम्मेदारी सबसे ज्यादा है कि वो अपने समाज के लोगों को बच्चों के अधिकारों के बारे में जागरूक करे.

यूनिसेफ बिहार की संचार विशेषज्ञ निपुण गुप्ता के मुताबिक बिहार में 4.7 करोड़ बच्चे हैं जो कुल जनसंख्या का 46 प्रतिशत है और यह अनुपात के हिसाब से देश के सभी राज्यों में बच्चों की जनसंख्या से अधिक है. बिहार में बच्चों की जनसंख्या स्पेन और यूक्रेन जैसे देशों की कुल जनसंख्या से भी अधिक है. उन्होंने कहा कि, पिछले दस सालों में नवजात मृत्यु दर में गिरावट आई है. जहां पहले प्रति 1000 बच्चो में 32 बच्चों की मृत्यु जन्म के समय हो जाती थी वो अब घटकर 28 रह गई है.

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