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बच्चों ने पटना में क्लीन एयर एक्शन प्लान की मांग की …

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सेंटर फॉर एन्वॉयरोंमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) ने भवन निर्माण गतिविधियों के दौरान होनेवाले प्रदूषण में कमी लाने के लिए माननीय उपमुख्यमंत्री श्री सुशील कुमार मोदी द्वारा नीति बनाने के निर्णय की सराहना की है। कंस्ट्रक्शन और इससे जुड़े विध्वंस के मलबों से होनेवाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए बिहार सरकार द्वारा गत मंगलवार को नीति बनाने का निर्णय लिया गया है और यह कदम ऐसे समय में ठीक ही उठाया गया हैजब पटना में प्रदूषित धूलकण के उच्च उत्सर्जन से वायु प्रदूषण ‘‘गंभीर’’ स्तर पर पहुंच गया है और भवन निर्माण गतिविधियां इसके प्रमुख स्रोतों में से एक है।

माननीय उपमुख्यमंत्री महोदय ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान’ के निर्माण का भी संकेत दिया हैजिसकी मांग अरसे से की जा रही है। ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान’ वायु प्रदूषण की गंभीरता के मद्देनजर इससे जुड़े बहुस्तरीय कदम उठाने पर जोर देता है और यह शहरों में बदतर होते एयर क्वालिटी इंडेक्स’ की दशा सुधारने के वास्ते अमल में लाया जाता है। यह बेहद महत्वपूर्ण कदम उठा कर बिहार सरकार ने बड़ी छलांग लगायी हैलेकिन वायु प्रदूषण के प्रबंधन की दिशा में अब भी अन्य ठोस कदम उठाये जाने की जरूरत है। ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान को न केवल अल्पकालिक व तात्कालिक नियंत्रण के उपायों से लैस होना चाहिएबल्कि इसके तहत लंबे समय में गंभीर प्रदूषण की दशा में इसे रोकने के दीर्घकालिक निवारक कदम भी होने चाहिए। ऐसे में ग्रेडेड एक्शन प्लान को स्रोत संविभाजन अध्ययन (सोर्स एपोर्शमेंट स्टडी) पर भी आधारित होना चाहिए।

सरकार के निर्णय की प्रशंसा करते हुए सीड के सीइओ रमापति कुमार ने कहा कि ‘‘हम वायु प्रदूषण को रोकने के लिए बिहार सरकार द्वारा एक नयी नीति बनाये जाने के निर्णय का स्वागत करते हैंसाथ ही पटना के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान की शुरूआत की भी सराहना करते हैं। हालांकि हमें एक व्यापक व सुपरिभाषित क्लीन एयर एक्शन प्लान पर अमल करने की जरूरत हैजो वायु प्रदूषण में प्रभावी ढंग से कमी लाने के अल्पकालिकमाध्यमिक व दीर्घकालिक लक्ष्यों से लैस हो। इन सभी एक्शन प्लान में तय समयसीमा के भीतर हरेक प्रदूषक स्रोतों के व्यावहारिक समाधानों को अनिवार्य तौर पर शामिल किया जाना चाहिए।’’

पटना में परिवेशी वायु प्रदूषकों से अवरूद्ध हो गयी हैजहां पर्टिकुलेट मैटर (PM) के दो रूप PM10 और PM2.5 चिंता का सबसे बड़ा कारण हैं। पिछले कई सालों में यह देखा गया है कि प्रदूषण का स्तर जाड़े के महीनों में बढ़ता गया है। चूंकि वायु गुणवत्ता में गिरावट के लिए कई स्रोत जिम्मेवार हैंऐसे में यह जरूरी है कि इन सभी स्रोतों से प्रदूषण उत्सर्जन को रेगुलेट करने के लिए सुनियोजित तथा सामूहिक प्रयास किये जायें। वैज्ञानिक अध्ययन दर्शाते हैं कि सड़क की धूल पटना की हवा में PM10 के संकेंद्रण के अधिकतम भार में ज्यादा योगदान देती हैवहीं रसोई के दौरान जलाये जानेवाले ठोस ईंधन या बायोमास के इस्तेमाल से PM2.5 का अधिकतम जमाव शहर के वायुमंडल में होता है। जबकि भवन निर्माण तथा इससे जुड़ी प्रदूषणकारी गतिविधियां पटना की हवा में PM10 और PM2.5 के संकेंद्रण में क्रमशः केवल 9 प्रतिशत और 3 प्रतिशत का ही योगदान देती हैं।

सबसे जरूरी बात यह कि ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान के तहत तब एक्शन लिये जाते हैंजब वायु गुणवत्ता में गिरावट ज्यादा बढ़ती चली जाती है। वायु प्रदूषण के व्यापक मसले पर दीर्घकालिक प्रभाव पैदा करने के लिए और प्रत्येक प्रदूषक स्रोत के समाधान के लिए सीड का सरकार से आग्रह है कि इससे ज्यादा ठोस और प्रभावी कदम उठाये जायें। सीड का मानना है कि शहर में मौजूद हरेक प्रदूषणकारी क्षेत्र की एमिशन प्रोफाइल’ बनाने के लिए अविलंब सोर्स एपोर्शमेंट स्टडी’ करने पर काम होना चाहिए।

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