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बदलने जा रही है पुलिस की वर्दी

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श के सभी पुलिसकर्मियों की वर्दी अब एक जैसी होने वाली है। पुलिस फोर्स की यूनिफॉर्म में एक बड़ा बदलाव होने वाला है। अभी तक देश के सभी पुलिसकर्मी अंग्रेजों के जमाने की वर्दी पहनते हैं।

पुलिस व आम जनता से लिए गए इनपुट के अनुसार मौजूदा यूनिफॉर्म में काफी खामियां हैं। अगर ये खामियां दूर कर ली गईं, तो जल्द ही हमारी पुलिस नए रंग-ढंग में नज़र आएगी।

देश के सभी पुलिसकर्मियों की वर्दी एक जैसी होने वाली है। पुलिस फोर्स की यूनिफॉर्म में एक बड़ा बदलाव होने वाला है। अभी तक देश के सभी पुलिसकर्मी अंग्रेजों के जमाने की वर्दी पहनते हैं। इस यूनिफॉर्म का कपड़ा इतना मोटा होता है कि पुलिसकर्मियों को गर्मी के मौसम में अच्छी खासी दिक्कत का सामना करना पड़ जाता है। यूनिफॉर्म में बदलाव लाने के लिए नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ डिजाइन अहमदाबाद (एनआईडी) को पुलिस ड्रेस डिजाइन करने का काम दिया गया है। अगर सबकुछ सही रहा तो पुलिसकर्मी जल्द ही नई वर्दी में नजर आने लगेंगे।

इसमें सिविल पुलिस के साथ ही केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस और सेंट्रल पैरामिलिट्री फोर्सेज की वर्दी भी फिर से डिजाइन की जा रही है। ड्रेस में पैंट-शर्ट और बूट के अलावा जैकेट, टोपी और बेल्ट को शामिल किया गया है। इसके अलावा रेनकोट और हेडगियर के डिजाइन भी तैयार किए गए हैं। ब्यूरो ऑफ रीसर्च ऐंड डिवेलपमेंट (BPR&D) के सहयोग से वर्दी के 9 नमूने तैयार किए गए हैं। इसे सभी राज्यों की पुलिस के साथ साझा किया गया है ताकि वे अपने हिसाब से चयन कर सकें। 9 राज्यों से मिले फीडबैक और पब्लिक शो के मुताबिक मौजूदा वर्दी में कई सारी दिक्कतें हैं। एक तो पूरे देश की पुलिस की वर्दी में कोई समानता नहीं है। दूसरा पुलिस की वर्दी बहुत मोटी है जो गर्मी के मौसम में दिक्कत करती है। इसके अलावा वर्दी में आधिकारिक सामग्री को रखने की भी पर्याप्त जगह नहीं है।

पुलिसवालों की वर्दी का कपड़ा काफी मोटा होता है। जिसे गर्मी में पहनना काफी मुश्किल होता है। टोपी मोटे कपड़े की होने की वजह से गर्मियों में सिरदर्द की वजह बन जाती है। वहीं हेलमेट इतने भारी हैं कि इमर्जेंसी परिस्थिति में पहनना मुश्किल हो जाता है। बेल्ट इतनी मोटी है कि झुकना मुश्किल हो जाता है। दुनियाभर के दूसरे देशों की तरह बेल्ट में मोबाइल फोन रखने की जगह और स्मार्ट कीज होनी जरूरी हैं।

मौजूदा वर्दी वाले जूते भी पुलिसवालों के लिए समस्या की वजह हैं। लंबे समय के लिए चमड़े के भारी जूते पहनना आसान नहीं होता है। इस यूनिफॉर्म की विजिबिलिटी भी धुंध में कम है। इसके अलावा खाकी रंग प्राइवेट एजेंसीज और अन्य विभागों के लोग भी प्रयोग करते हैं। BPR&D की निदेशक मीरा बोरवान्कर ने बताया, ‘खाकी वर्दी की बहुत आलोचना होती है। इसमें बदलाव होना जरूरी है। मौजूदा वर्दी पुलिसवालों के लिए सभी मौसम में पहनने लायक नहीं है। इसका विकल्प लाना जरूरी है।’

9 राज्‍यों की पुलिस व आम जनता से लिए गए इनपुट के अनुसार मौजूदा यूनिफॉर्म में काफी खामियां हैं। अगर ये खामियां दूर कर ली गईं, तो जल्द ही हमारी पुलिस नए रंग-ढंग में नजर आएगी।

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