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बिहार की इस बेटी ने अपनी और मां की पायल बेच कर बनवाया TOILET, सबसे कम उम्र की स्वच्छता आइकॉन बनी

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देश की सबसे कम उम्र की स्वच्छता की आइकॉन बनी रानी को मंच पर तो लाया गया बीडीओ से लेकर डीएम तक ने चर्चा की लोगों को भी लगा कि जिस धार के तहत रानी ने नोनहर पंचायत को ओडीएफ कराने में अपनी भूमिका की निर्वहन किया। उसे जरूर सम्मानित किया जाएगा। लेकिन लोगों की इंतजार खत्म तो हो गई लेकिन रानी सम्मानित नहीं हुई ?

5वी क्लास की रानी जिन्होंने जिद कर अपनी मां बाप से अपने पायल बेचवा शौचालय की निर्माण कराई वह बिहार की सबसे कम उम्र की स्वच्छता की आइकॉन बन चुकी है। बिक्रमगंज प्रखंड के नोनहर पंचायत के नोनहर गांव की दलित बस्ती की दसवीं साल की सामान्य लड़की है जो अपनी पंचायत के सभी गांवों में घूम-घूम कर महिलाओं पुरुषों से हाथ जोड़ शौचालय बनाने में सकारात्मक प्रभाव डाली है।

रानी ने अपनी व मां की पायल बेच पिता से बनवाया था शौचालय

गांव में ही 5वी में पढ़ने वाली रानी गांव की दलित बस्ती की हरेराम पासवान की पुत्री है हुआ यह था कि नवंबर 2016 में उसके स्कूल में बीडीओ शशिकांत शर्मा, और बीईओ कमलेश कुमार सिंह जागरुकता कार्यक्रम में बच्चों को साफ-सफाई के महत्व को समझा रहे थे कि अपनी सहेलियों के साथ रानी ने ऑफिसरों के बातों को ध्यानपूर्वक सुन घर पहुंचने के बाद पिता हरेराम पासवान और मां तारेगना देबी से शौचालय बनवाने की जिद कर बैठी लेकिन आर्थिक बोझ से दबे पिता हरेराम ने बहुत समझाया लेकिन उसने एक न सुनी अपने पैर के पायल निकाल पिता को दी और बोली ई बाद में बन जाई शौचालय पहले बनी…बेटी की बात सुन भावुक माता ने अपनी भी पायल और रानी की पायल को बेच शौचालय के निर्माण कराई थी।

रानी ने जिद कर भले ही सबसे कम उम्र की आइकॉन बन गई हो लेकिन जब नोनहर पंचायत को खुले मुक्त पर कार्यक्रम हुआ तो उस मंच पर रानी के बारे में चर्चा तो हुई पर मंच के किसी भी कोने में दिखी नहीं ना ही अधिकारियों ने सम्मनित करना मुनासिब समझा।

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