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बिहार की बेटियों को सलाम, उठायी कुदाल ओर बना दिया स्कूल जाने का रास्ता

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जब बात नारी सशक्तिकरण की आती है तो नारी का हर क्षेत्र में आगे आना इस बात का प्रमाण है बेटी बेटियां अब आगे बढ़ने की हिम्मत रखती है और समाज में पुरुषों के बराबर अपनी ज़िम्मेदारियाँ उठाने को तैयार हैं।

“अरे बेटी तुम रहने दो। हमलोग सड़क ठीक कर रहे हैं ना। तुम लड़कियां क्यों कुदाल और टोकड़ी लेकर आ गई।”

मुशहरी के मुजफ्फरपुर जिला के पीरमुहम्मदपुर गांव से शहर की ओर आने वाले टूटे रास्तों पर गुरुवार को बेटियों को कुदाल और टोकड़ी उठाते देख अभिभावकों ने मना किया।

तब संगीता, मनीषा, आरती समेत कई बेटियों ने जवाब दिया कि हमारी पढ़ाई के लिए जब आप सब खुद रास्ता बना रहे हैं तो हम क्यों नहीं। बच्चियों का यह हौसला देख अन्य ग्रामीण भी जुट गए। सबने शाम तक लगभग 200 मीटर सड़क को इस लायक बना दिया कि बेटियां साइकिल से स्कूल जा सकें। टूटी सड़क ने पढ़ाई रोकी तो ये बहादुर बेटियां खुद सड़क बनाने लगीं। बाढ़ ने इस गांव से शहर की ओर आने वाली सड़क को पूरी तरह काट दिया है।

 

पीरमुहम्मदपुर समेत आसपास के पांच गांवों की बेटियां पढ़ने के लिए साइकिल से शहर आती हैं। लेकिन इन दिनों टूटी सड़क ने इन बेटियों का स्कूल-कॉलेज जाना पूरी तरह बंद करा दिया है। 8वीं पास करने के बाद यहां की बच्चियों को पढ़ने के लिए शहर आना पड़ता है। लेकिन गांव से शहर आने वाला रास्ता टूटा होने के कारण ये बेटियां पिछले कई दिनों से स्कूल-कॉलेज नहीं जा पा रही थीं।

इन बच्चियों के पढ़ने की ललक देख गुरुवार को अभिभावकों ने सड़क ठीक करने की ठानी तो बेटियों ने भी कुदाल उठा ली। इस संबंध में अभिभावक सुबोध कुमार कहते हैं कि 5-7 फीट गड्ढ़ा बन गया था। ऐसे में साइकिल लेकर बच्चियां कैसे निकले। हमलोग इसे भर कर इस लायक बना रहे हैं कि साइकिल-मोटरसाइकिल भले दिक्कत से ही सही, कम से कम निकल तो सकें।

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