THE BIHARI

बिहार की यह बेटी अंग्रेजों की धरती पर अपनी मातृभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में लगी है

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हिन्दी सिर्फ एक भाषा नहीं है बल्कि एक ऐसी मजबूत धागा है जो लोगों को एक-दुसरे से जोड़ती है। हिन्दी को राष्ट्रभाषा, राजभाषा, सम्पर्क भाषा और जनभाषा होने का गौरव प्राप्त है साथ ही अब इन सबको पार कर हिन्दी विश्व भाषा बनने की ओर अग्रसर है।

इसी सपने को हकीकत में बदलने के मकसद से बिहार की एक बेटी अनुपमा कुमार ज्योति विदेशों में हिन्दी के प्रचार-प्रसार में लगी है, वह भी अंग्रेजी धरती ब्रिटेन में जो अंग्रेजी भाषा की जन्मभूमि है।

अनुपमा कुमार ज्योति बिहार के मुजफ्फरपुर की रहने वाली है और अभी वर्तमान में लंदन में रहती है । उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई प्रभात तारा विद्यालय मुज़फ़्फ़रपुर से की। उसके बाद स्नातक की शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय से पूरी की।

यूनिवर्सिटी ओफ ससेक्स से पोस्ट ग्रैजूएशन करने के बाद वह समाज सेवा, हिंदी लेखन व ब्रिटेन की राजनीति में सक्रिय हो गयीं। वर्तमान में लंदन में हिन्दी भाषा में छपने वाली एकमात्र पत्रिका पुरवाई के संपादक मंडल में शामिल हैं। ब्रिटेन में कनजरवेटिव पार्टी की वरिष्ठ नेता व कार्यकर्ता भी है।

 

ब्रिटेन में युवा वर्ग को हिन्दी लेखन के लिए प्रोत्साहित करने के लिए लंदन की युवा लेखक व बिहार की बेटी अनुपमा कुमार ज्योति और उनकी टीम ने हाल ही में लंदन में एक कार्यशाला का आयोजन किया । जिसमें मुख्य अतिथि के तौर पर प्रख्यात लेखिका और गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा थी और मशहूर कथाकार तेजेन्द्र शर्मा उपस्थित थे।

कार्यशाला में मृदुला सिन्हा ने अपने शुरूआती लेखन की बातों को बहुत ही रोजक ढंग से लोगों को सुनाया साथ ही राजनीतिक जीवन की जानकारी दी ।

17 नवम्बर 2016 को ब्रिटेन की संसद में (हाउस ऑफ़ कॉमन्स) तीन दिवसीय प्रवासी सम्मेलन के पहले दिन कथा यू.के. ने प्रवासी संसार पत्रिका के एक दशक पूरा होने का जश्न मनाया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि गोवा की राज्यपाल महामहिम श्रीमती मृदुला सिन्हा ने ब्रिटेन में सक्रिय संस्थाओं और अध्यापकों, लेखकों को उनके उल्लेखनीय कामों के लिए ब्रिटेन की संसद (हाऊस अॉफ कॉमन्स) में सम्मानित किया । इनमें प्रो. डॉ. कृष्ण कुमार (गीतांजलि), दिव्या माथुर (वातायन), रवि शर्मा (मिडिया), अनुपमा कुमार ज्योति( लेखक व कवि)आदि लोग शामिल थे।

बातचीत में अनुपमा कुमार ज्योति ने बताया कि हम यहाँ अभी बहुत सारे योजनाओं पर काम कर रहें हैं जिसमें भारतीय उच्चायोग लंदन से भी काफी सहयोग मिल रहा है । हिन्दुस्तान में तो हिन्दी लोकप्रिय है ही, हम लोग का मकसद है कि हिन्दी विदेशी धरती पर अपनी धाक जमाए और इसका विश्वस्तर पर विस्तार हो।

बिहार के बारे में उन्होंने कहा कि भले वह अपने मातृभूमि से बहुत दूर रहती है मगर अभी भी वह दिल से पक्का बिहारी है।

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