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बिहार के इस गांव में आमिर खान के ‘दंगल’ की लड़कियां, यहां खेतों में उगते हैं मेडल

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सिवान बाहुबली शहाबुद्दीन के नाम से जाना जाता है। लेकिन, इसकी एक और तस्वीर भी है। यहां के एक गांव ‘लक्ष्मीपुर’ के खेतों में अभ्यास कर लड़कियां विभिन्न खलों में मेडल जीत रही हैं।

”म्हारी छोरियां लड़कों से कम हैं के।” हाल ही में रिलीज आमिर खान की चर्चित फिल्म ‘दंगल’ का यह डायलॉग सिवान के मैरवा प्रखंड स्थित लक्ष्मीपुर गांव की लड़कियाें पर सटीक बैठता है। यहां की लड़कियां हॉकी, फुटबॉल, बॉल बैडमिंटन व हैंडबॉल से लेकर दौडऩे तक में माहिर हैं।

खास बात यह भी है कि इन सभी लड़कियों के कोच व गाइड से लेकर सबकुछ सरकारी स्कूल के शिक्षक संजय पाठक हैं। संजय के खेत का बड़ा हिस्सा लड़कियों के लिए स्पोर्ट्स कांप्लेक्स की तरह है। इसी में वे विभिन्न खेलों का अभ्यास करती हैं। यहीं के अभ्यास की बदौलत वे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत रही हैं।

सब्जी बेचने वाले की बेटी नेशनल फुटबॉलर

सब्जी बेचने वाले शंभू प्रसाद की बेटी अमृता 2015 में अंडर-16 भारतीय फुटबॉल टीम का नेतृत्व करने कर चुकी है। उसकी उपलब्धियों को देखते हुए 2014 लोकसभा और 2015 में विधानसभा चुनाव में आयोग ने सिवान जिला का ब्रांड एंबेसडर बनाया था। 2013 में अमृता पहली बार भारतीय टीम की सदस्य चुनी गईं थी। इस टीम ने श्रीलंका में स्वर्ण जीता था।

पंक्चर बनाने वाले की बिटिया घूम आई फ्रांस

पंक्चर बनाने वाले सुधन अंसारी की बेटी तारा खातून को 2014 में स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने स्कूली वर्ल्ड कप में भाग लेने फ्रांस भी भेजा था। इस टीम ने तीन देशों को हराया था।

बिजली मिस्त्री के घर रजत पदक

बिजली मिस्त्री रामजीत यादव की फुटबॉलर बेटी निशा अप्रैल 2016 में तजाकिस्तान में रजत पदक जीतने वाली अंडर 14 भारतीय टीम की सदस्य थी।

कई और लड़कियों ने किया नाम रोशन

खेत में प्रैक्टिस कर सोना, चांदी व कांस्य जीतने वाली बच्चियों की फेहरिस्त लंबी है। राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में लक्ष्मीपुर सहित पूरे बिहार का नाम रोशन करने वाली धर्मशीला कुमारी, रिंकू कुमारी, राधा कुमारी, चंदा कुमारी, अंतिमा कुमारी, उषा, प्रियंका, सलमा खातून, मंजू, निश्मा, रागिनी, गायत्री, चंपा, मधु, काजल सहित 50 से ज्यादा लड़कियां हैं।

गांव के अभव भरे माहौल में मेधा को तलाशकर उसे तराशना कोई आसान काम नहीं। लेकिन कोच संजय पाठक का यह जुनून है। वे कहते हैं, ”लड़कियों को खेल के मामले में आगे बढ़ाना मेरा लक्ष्य है। हर किसी में किसी खेल की प्रतिभा छिपी होती है और मैं उसे निखारने की कोशिश करता हूं।” वे कहते हैं कि उनके खेत का हिस्सा फुटबॉल मैदान के बराबर नहीं है, लेकिन लड़कियां उसी में मेहनत करती हैं। परिणाम सामने है।

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