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बिहार दिवस पर महिला सशक्तीकरण की दिखेगी झांकी

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शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राजकीय समारोह में 22 मार्च से तीन दिनों तक महिला सशक्तीकरण की वानगी दिखेगी। महिलाओं को हर पवेलियन, हर तस्वीर और हर कार्यक्रम में तरजीह दी जाएगी। हालांकि इस बार बिहार दिवस का केन्द्रीय थीम ‘नशा मुक्ति’ है लेकिन इसे दर्शाने के लिए जगह-जगह जो दृश्य रेखांकित किए गए हैं, उनमें महिलाओं की मांग पर राज्य में लागू पूर्ण शराबबंदी के बाद समाज में आई खुशहाली महिलाओं को केन्द्र में रखकर ही दिखाई गई है।

मुख्य मंच पर तीनों दिन क्रमश: देश की नामचीन महिला गायिकाओं सुनिधि चौहान, मालिनी अवस्थी और आकृति कक्कड़ का गायन होगा। मुख्यमंच का बैकड्राप जहां सूरजमुखी के फूलों से दीप-दीप कर रहा है, वहीं गांधी मैदान के सभी गेटों पर साइकिल चलाती छात्रा की तस्वीरें राज्य में महिलाओं के विकास की कहानी कह रही हैं। महिला सशक्तीकरण का सबसे दमदार दृश्य जनशिक्षा निदेशालय के कार्यक्रमों में दिखेगा। यहां राज्य के सभी 38 जिलों से आने वाली 12 सदस्यीय कला जत्थों में 19 जिलों की कला जत्थे ऐसी होंगी, जिनमें टीम लीडर, निर्देशक से लेकर कलाकार तक सभी महिलाएं ही होंगी। जनशिक्षा के सहायक निदेशक मो. गालिब खान ने बताया कि किशनगंज, सुपौल, अररिया, मधेपुरा, मधुबनी, अरवल, बक्सर, सीतामढ़ी, वैशाली, भोजपुर, बेगूसराय, पटना, खगड़िया, सारण, गया, शेखपुरा, समस्तीपुर और पश्चिम चंपारण इनमें शामिल हैं। शेष 19 जिलों के कला जत्थे में भी 4 से पांच महिला कलाकार हैं।

नामचीन महिलाओं के नाम पर कला जत्था का नाम
दुष्यंत कुमार ने लिखा है-जो लोग मर चुके थे, मौजूद हैं इस सभा में, धीरे-धीरे यहां का मौसम बदलने लगा है’। अबकी बिहार दिवस में इसे कलाकारों ने साकार किया है। कला जत्थों खासकर महिला कला जत्थों ने अपना नामकरण भी देश की नामचीन महिलाओं के नाम पर किया है। सुपौल ने गार्गी, किशनगंज ने रजिया सुल्तान, अररिया ने रानी लक्ष्मीबाई, मधेपुरा ने भारती, मधुबनी ने कस्तूरबा गांधी, सीतामढ़ी ने एनी बेसेंट, वैशाली ने आम्रपाली, पटना ने इंदिरा गांधी, बेगूसराय ने कल्पना चावला, खगड़िया ने मदर टेरेसा के नाम पर अपने कला जत्थे का नामकरण किया है।

तेरे सिर पर यह आंचल बहुत खूब है …
गांधी मैदान में बने सभी पवेलियन में इसबार एक महिला उद्घोषक बीईपी ने रखा है। मुख्य मंच पर सोनी कुमारी तो श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में अर्चना चौधरी बतौर उद्घोषक महिलाओं का मान बढ़ाएंगी। कुल मिलाकर बिहार दिवस समारोह राज्य में महिलाओं की तरक्की कुछ इस अंदाज में बयान करेगा-‘ तेरे सिर पर यह आंचल बहुत खूब है लेकिन, तू इस आंचल का परचम बना ले तो अच्छा’।

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