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बिहार में बाल विवाह को लेकर अलख जग चुका है। पढिये यह रिपोर्ट

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बेटी पढ़ेगी तो पूरा परिवार पढ़ेगा और परिवार पढ़ेगा तो पूरा समाज में शिक्षा का विस्तार होगा। जिस समाज में शिक्षा का विस्तार है, वह समाज विकसित है। बिहार में बाल विवाह को लेकर अलख जग चुका है। अब बेटियां घरों में नहीं बल्कि स्कूल जाकर शिक्षा ग्रहण करना चाहती है।

पिछले एक साल की बात करें तो सैकड़ों बेटियों ने स्कूलों में जाकर दाखिला लिया है। बेटियों के इस काम में महिला बाल विकास निगम और यूनिसेफ मदद भी कर रहा है।

छह जिला के 1800 गांव में चल रहा अभियान : बाल विवाह निषेध अभियान से अभी छह जिलों को जोड़ा गया है। इसमें वैशाली, गया, नवादा, समस्तीपुर, दरभंगा और पटना शामिल है।

इन जिलों के 17 प्रखंड के 290 पंचायत के कुल 1800 सौ गांव को जोड़ा गया है। इन जिलों में किशोर और किशोरी समूह बनाया गया है। यह समूह गांव-गांव जाकर माता-पिता और बेटियों को जागरूक कर रहा है। माता-पिता को बाल विवाह की बुराइयों से अवगत कराया जाता है और बेटियां को स्कूल तक पहुंचाया जाता है।

एक साल में पांच सौ बेटियां पहुंचीं स्कूल : उन गांवों को अभियान से जोड़ा जा रहा है जिन गांवों में बाल विवाह के मामले ज्यादा आते रहे हैं वहां बच्चियों को स्कूल तक पहुंचाने का यह अभियान पिछले एक साल से चल रहा है।

वैशाली और गया के गांव में काम कर रही रिचा ने बताया कि हर पंचायत के गांवों में जागरूकता कार्यक्रम चलाये जा रहे है। अब तक लगभग पांच सौ से अधिक बेटियों को स्कूल तक पहुंचाया जा चुका है। ग्रामीण स्तर पर लोगों के बीच जाना और उन्हें जन संवाद से जोड़ने का काम किया जा रहा है।

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