बिहार समाचार

बोधगया में विश्व प्रसिद्ध कालचक्र पूजा का आयोजन. भाग लेंगे दलाई लामा

Get Rs. 40 on Sign up

बोधगया में 3 से 15 जनवरी 2017 तक विश्व प्रसिद्ध कालचक्र पूजा का आयोजन किया जा रहा है। इस पूजा में बौद्ध गुरू दलाई लामा के साथ ही तीन लाख से ज्यादा तीर्थयात्री और पर्यटक शामिल लेगें। पूजा की तैयारी बुद्धिष्ट के साथ ही जिला प्रशासन और व्यवसायी अपने-अपने स्तर से कर रहें हैं।

कालचक्र

 

जानकारी के अनुसार, कालचक्र पूजा की तैयारी कई स्तरों पर की जा रही है जिसका निरीक्षण करने आये मगध प्रमंडल के आयुक्त लियान कुंगा ने कहा कि जिला प्रशासन आवासन, सफाई, पेयजल एवं सुरक्षा के इंतजाम को लेकर व्यापक तैयारी कर रही है जिसमें पांच हजार जवान के साथ ही सीसीटीवी एवं अन्य आधुनिक उपकरणों का सहयोग लिया जाएगा।

महाबोधि मंदिर में आंतकी घटनाएं 2013 में ही हो चुकी हैं और दलाई लाम की सिक्यूरिटी भी उच्च स्तर की होती है जिसकी तैयारी पहले से ही की जा रही है। पूजा में भाग लेने के लिए दलाई लामा 28 दिसबंर को ही बोधगया पहुंच जाएंगे। इस पूजा में तीन लाख से ज्यादा बुद्धिष्ट एवं अन्य धर्म के लोग के शामिल होने की संभावना है।

बौध धर्म को मानने वाले लेते हैं शिक्षा

बौद्ध धर्म की मानें तो बुद्ध धर्म को मानने वाले लोगों की पहली इच्छा दलाई लामा से दीक्षा लेने की होती है जिसकी वजह से इतनी भीड़ होती है।

इस पूजा के आयोजन के लिए व्यवसायी वर्ग भी तैयारी कर रहा है। स्थानीय व्यवसायी के साथ ही दूसरे इलाकों के व्यवसायी भी यहां अपने दुकान सजाना शुरू कर दिए हैं। बौद्धिष्ट के लिए कालचक्र पूजा में शामिल होना हिन्दू के महाकुंभ और मुस्लिम के हज पर जाने सरीखा होता है। इसमें भाग लेने के लिए हमारे विरोधी चीन के साथ ही करीब 40 देश के लाखों बौद्ध श्रद्धालु यहां आ रहें हैं। जिला प्रशासन का सहयोग लेकर आयोजन समिति कई महीने पहले से ही तैयारी में जुटी हुई है।

कालचक्र पूजा क्या है ?

कालचक्र का अर्थ है ‘समय का चक्र’। तिब्बती बौद्ध धर्म का यह अहम हिस्सा है, जिसे एक तांत्रिक अनुष्ठान भी माना जाता है। कालचक्र तंत्र की मुख्य देवी भी पुरुष व स्त्री तंत्र के मिलाप को दर्शाती है। कालचक्र अभिषेक में बौद्ध कर्मकांड को लेकर प्रवचन तथा अंत में दीक्षा शामिल है। कालचक्र अभिषेक से पूर्व संचालनकर्ता धर्मगुरु दलाईलामा प्रतिदिन प्रवचन देते हैं।

क्या है विधि ?

कालचक्र की शुरुआत देवताओं का आह्वान मंडला निर्माण व भूमि पूजन कर की जाती है। आयोजन स्थल पर एक कुंड बनाया जाता है। उसमें संचालनकर्ता धर्मगुरु की उपस्थिति में दक्ष लामा द्वारा पानी भरा जाता है। उसके बाद तंत्र के प्रतीक मंडला का निर्माण आरंभ किया जाता है। मंडला निर्माण में धर्मगुरु की सहायता दक्ष लामागण करते हैं। मंडला के बाहर धर्मगुरु द्वारा धार्मिक मंत्र उकेरा जाता है। मंडला को बुरी आत्माओं से दूर रखने के लिए लामाओं द्वारा पारंपरिक परिधान व वाद्ययंत्र के साथ नृत्य किया जाता है। पूजा समापन के पश्चात श्रद्धालु मंडला का दर्शन करते हैं और अंत में इसे तालाब या नदी में विसर्जित कर दिया जाता है।

 

Write your Comments here

comments

Show More
रहें चौबीसो घंटे बिहार और देश दुनिया की ख़बरों से अपडेट, फेसबुक पेज जरुर लाइक करें

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Close