THE BIHARI

मिलिए बिहार के इस परिवार से, अंग्रेजों के जमाने से ही हैं दहेज़ के खिलाफ

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दहेज प्रथा के खिलाफ जंग का एलान किया है। लेकिन, सूबे में एक परिवार ऐसा भी है जो अंग्रेजों के समय से ही दहेज के खिलाफ अलख जगा रहा है। आज इस परिवार की तीसरी पीढ़ी भी इसी राह पर है।
यह परिवार है सीतामढ़ी के प्रथम विधान पार्षद रहे सांवलिया बिहारी लाल वर्मा का। इस परिवार ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दहेजबंदी के फैसले का स्वागत किया है। परिवार के सदस्यों की मानें तो समाज में इसका निश्चित ही सकारात्मक असर होगा।
जिला मुख्यालय डुमरा निवासी सांवलिया बिहारी लाल वर्मा के तीन पुत्रों एवं दो पुत्रियों की शादी बगैर दहेज के हुई थी। परिवार में किसी आयोजन के दौरान गिफ्ट लेने की भी परंपरा नहीं है।


शादियों में दहेज की परंपरा नहीं

परिवार की वर्तमान पीढ़ी के डॉ. आनंद प्रकाश वर्मा अपने दादाजी के बताए मार्ग का पूरी तरह से अनुसरण कर रहे हैं। कहते हैं, पिता विनोद बिहारी लाल वर्मा दादाजी के मार्ग पर चले। अब हम लोग उसी राह पर हैं। बेटों की शादी में दहेज नहीं लिया जाता है।

वे बताते हैं, दादाजी की दो बेटियां शांतिलता और पुष्पलता थीं। उनकी शादी बगैर दहेज हुई। तीनों बेटों विपिन, विनोद बिहारी एवं विजय की शादी बगैर दहेज हुई। इसके उपरांत एक भाई विपिन के तीन बेटों और एक बेटी की शादी भी बगैर दहेज हुई। आगे भी परिवार में यह परंपरा कायम रही।


प्रशासन ने भी की सराहना

परिवार की इस पहल पर प्रशासन की भी नजर है। सीतामढ़ी के उपविकास आयुक्‍त राशीद आलम बताते हैं कि सांवलिया बिहारी लाल वर्मा के बाद उनके वंशज भी दहेज नहीं लेने के संकल्प को बखूबी निभाते आ रहे हैं। यह समाज के लिए प्रेरणा है। अगर इस परिवार का अनुकरण किया जाता है तो वह दिन दूर नहीं, जब हमारा बिहार दहेज प्रथा से मुक्त हो जाएगा

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