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मिशन 2019: बिहार की हार का दाग धोने की तैयारी में अमित शाह

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साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को मिली जीत के बाद हुए तमाम चुनावों में बिहार और दिल्ली के विधानसभा चुनाव ही ऐसे रहे हैं जहां बीजेपी को मात मिली है. ऐसे में अब पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने बिहार में मिली हार के दाग को धोने की पुरजोर कोशिशें शुरू कर दी हैं. इसके लिए वह अभी से ही साल 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुट गए हैं.

2015 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को मिली हार में मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी नीतीश कुमार की अहम भूमिका थी. अब वही नीतीश कुमार और उनकी पार्टी बीजेपी खेमे में हैं. लेकिन अमित शाह ने नीतीश को बैकफुट पर धकेलने का मन बना लिया है.

क्या होगी रणनीति?

2019 के लोकसभा चुनाव में परचम लहराने की रणनीति तैयार करने के लिए गुरुवार शाम दिल्ली में बीजेपी मुख्यालय में बिहार बीजेपी की कोर कमेटी की बैठक हुई. बिहार में जेडीयू के साथ सरकार बनने के बाद अमित शाह के साथ कोर कमेटी की यह पहली मीटिंग थी. इस मीटिंग में कुछ ऐसे फैसले लिए गए जिनसे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पेशानी पर बल पड़ सकते हैं.

इस बैठक में फैसला हुआ कि सूबे में बीजेपी के कार्यकर्ताओं को इलेक्शन मोड में लाने के लिए अमित शाह अक्टूबर में तीन दिन बिहार के दौरे पर रहेंगे. इस दौरान वे हर स्तर पर लोकसभा चुनाव की तैयारियों का जायजा लेंगे. करीब दो दर्जन मीटिंग भी करने का प्लान है.

गुरुवार की बैठक में राज्य के हर बूथ पर कार्यकर्ताओं की संख्या बढ़ाने का फैसला हुआ. साथ ही बीजेपी अध्यक्ष ने सरकार में शामिल मंत्रियों को हर सोमवार और मंगलवार को जनता के साथ संवाद करने का भी निर्देश दिया.

नीतीश कुमार को ज्यादा सीट देने के मूड में नहीं बीजेपी

अमित शाह के घर हुई मीटिंग में मूल रूप से जिस बात पर सहमति बनी उससे नीतीश की परेशानी बढ़ सकती है. मीटिंग में मौजूद बिहार के एक नेता के मुताबिक इस बार लोकसभा चुनाव में जेडीयू के साथ सीटों के बंटवारे में 2009 के फॉर्मूले को नहीं दोहराया जाएगा.

उस वक्त बिहार की 40 सीटों में से नीतीश ने 25 सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े किए थे. बीजेपी के हिस्से में 15 सीटें आईं थी. इस बार बीजेपी खुद 23 सीटों पर लड़कर बाकी सभी सहयोगियों के लिए महज 17 सीटें छोड़ने का मन बना चुकी है.  बीजेपी, जेडीयू के खाते में 11 सीटें, लोजपा के खाते में 4,रालोसपा को 2 सीटें बांटने की रणनीति पर विचार कर रही है.अमित शाह, जीतन राम मांझी के हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा को बीजेपी में विलय का ऑफर दे चुके हैं. खबर यह भी है कि नीतीश 2019 में लोकसभा चुनाव के साथ-साथ विधानसभा का चुनाव भी कराना चाहते हैं. इस पहलू पर भी अमित शाह ने राज्य के पार्टी के नेताओं के साथ विस्तार से चर्चा की.

रामविलास पासवान और उपेंद्र कुशवाह की सीटों पर है नजर

2014 के चुनाव में बीजेपी को सूबे में 22 सीटें हासिल हुईं थी जबकि सहयोगी दलों में रामविलास पासवान की लोजपा को छह और उपेंद्र कुशवाह की पार्टी रालोसपा को तीन सीटें हासिल हुईं थी.

रालोसपा के एक सांसद अरुण कुमार, उपेंद्र कुशवाह का साथ छोड़ चुके हैं. अब अरुण कुमार बीजेपी के टिकट से चुनाव लड़ना चाहते हैं जबकि रामविलास पासवान की पार्टी के दो सांसद भी उनसे अलग हो चुके हैं. खगड़िया के सांसद महबूब अली कैसर और वैशाली के सांसद रामाकिशोर सिंह अब पासवान के साथ नहीं हैं. लिहाजा बीजेपी अब इन दोनों सीटों पर अपना दावा ठोकने के लिए तैयार है.

जीतन राम मांझी भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से अपने बेटे संतोष मांझी को एमएलसी बना कर बिहार की मंत्रिपरिषद् में शामिल करने की गुहार लगा चुके हैं. जीतन राम मांझी को गवर्नर बनाने की रणनीति पर अमित शाह विचार भी कर रहे हैं. मांझी की मांगों को पूरा करने के लिए अमित शाह सही वक्त का इंतजार कर रहे हैं और वो वक्त  होगा साल 2018 के आखिर महीने.

बीजेपी मुख्यालय में  हुई इस मीटिंग में बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, पथ निर्माण मंत्री नंदकिशोर यादव, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के अलावा प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय, केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, राधामोहन सिंह, गिरिराज सिंह, डॉ. सीपी ठाकुर शामिल थे.

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