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“यह ‘रसगुल्ला’, न तो ओडिशा का है न बंगाल का, यह बिहार का है जी !”

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हाल-फिलहाल प्रिंट मीडिया और सोशल मीडिया में खिचड़ी पर तू-तू-मैं-मैं जारी है,लेकिन इसी बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने लंदन से ट्वीट कर यह कहा कि ”हम सभी के लिए मीठी खबर है। हम खुशी और गर्व से यह कहना चाहते है कि पश्चिम बंगाल में सर्वप्रथम रसगुल्ले के ईजाद होने का भौगोलिक पहचान टैग (जीआई टैग) मिल गया और रसगुल्ले पर हमारा अधिकार सिद्ध हो गया है । अब इसके पेटेंट की तैयारी है ।”2010 में एक मैगज़ीन द्वारा करायें गए सर्वे में रसगुल्ला के राष्ट्रीय मिठाई के रूप में पेश किया गया था और उसके बाद ओडिशा सरकार ने रसगुल्ला की भौगोलिक पहचान के लिए कदम उठा दिया और दावा किया कि मिठाई का ताल्लुक उसी राज्य से है लेकिन पश्चिम बंगाल ने उसका विरोध किया और  उसे अपना क्षेत्र का बताया लेकिन WB की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ट्वीट के बाद से रसगुल्ले पर पश्चिम बंगाल ने कब्जा जमा लिया लेकिन आज ‘मैसेंजर ऑफ ऑर्ट’ में पढ़ते है ‘मैसेंजर ऑफ ऑर्ट’ की जुबानी की रसगुल्ले का ईजाद न तो बंगाल ने किया ,न ही ओडिशा ने बल्कि यह बिहार की देन हैं, आइये पढ़े …

आए दिन अखबारों, लोगों के मुखारविंद और सोशल मीडिया में ‘ये दिल मांगे मोर–रसगुल्ले’ किनके हैं–बंगाल के हैं या उड़ीसा के — नित्य चर्चा लिए हैं ! 1912 से पहले ‘उड़ीसा’ बंगाल में था और 1936 से पहले ‘उड़ीसा’ बिहार में था । इसतरह से बिहार और उड़ीसा — दोनों बंगाल से ही निःसृत है, बावजूद तीनों प्रांतों की संस्कृति अलग-अलग हैं । रसगुल्ले बनानेवाले ‘हलवाई’ जाति के लोग या कारीगर सर्वाधिक संख्या में बिहार से हैं । बंगाल और उड़ीसा में रसगुल्ले बनाने वाले कारीगर और उनके पूर्वज बिहार से रहे हैं । आज भी उन कारीगरों से उनके मूल डोमिसाइल से सम्बंधित विवरण पूछे जा सकते हैं । जो भी हो, रसगुल्ला नाम सुनते ही मुँह में पानी आ जाती है।

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