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राहत की बात:बिहार में 5 हजार बीएड डिग्रीधारी प्राथमिक शिक्षकों को राहत

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राज्य के सरकारी स्कूलों की पहली से पांचवीं कक्षा में कार्यरत बीएड डिग्रीधारी करीब पांच हजार शिक्षकों को राज्य सरकार राहत देने वाली है। प्रारंभिक कक्षा के ऐसे शिक्षकों को एनआईओएस से 18 माह के डिप्लोमा इन एलिमेन्ट्री एजुकेशन (डीईएल-एड) कोर्स करने की अनिवार्यता से छूट मिल सकती है। एनसीटीई ने मान्यता दे दी तो नेशनल स्कूल ऑफ ओपेन स्कूलिंग (एनआईओएस) प्रारंभिक कक्षा के बीएड डिग्रीधारी शिक्षकों के लिए छह माह का संवर्द्धन कोर्स तैयार करेगा।

जानकारी के मुताबिक राज्य के सरकारी स्कूलों में बहाल हुए करीब 5000 अप्रशिक्षित शिक्षकों ने सेवा के दौरान बीएड की डिग्री ले ली। अब केन्द्र सरकार के निर्देश पर राज्य सरकार ने प्रारंभिक कक्षाओं (पहली से आठवीं) के सभी शिक्षकों के लिए 31 मार्च 2019 तक डीईएलएड की डिग्री अनिवार्य कर दी है। ऐसे में इन 5000 बीएड डिग्रीधारियों के लिए समस्या हो गयी थी कि यदि वे तय समय में डीईएलएड नहीं कर पाते हैं तो उनकी नौकरी 1 अप्रैल से स्वत: चली जाएगी। शिक्षा विभाग और एनआईओएस के बीच ऐसे शिक्षकों के लिए एक शार्टटर्म कोर्स डिजाइन करने पर सहमति बन गयी है।

यह छह महीने का संवर्द्धन प्रशिक्षण होगा। हालांकि अभी इसपर नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) की स्वीकृति ली जाएगी। स्वीकृति मिली तो ऐसे शिक्षकों का छह माह के संवर्द्धन कोर्स में नामांकन शुरू होगा।

ट्रेनिंग और इंटर का कोर्स साथ-साथ
एनआईओएस से 18 माह के डीईएलएड कोर्स करने के लिए प्रारंभिक कक्षा के शिक्षकों को इंटरमीडिएट में 50 फीसदी अंक अनिवार्य है। जिन्हें इससे कम अंक होंगे वे एनआईओएस से डीईएलएड कोर्स और इंटर इम्प्रूवमेंट दोनों साथ-साथ कर सकेंगे। हालांकि वे उसी विषय में इंटर परीक्षा दे पाएंगे, जिनमें उन्हें इंटरमीडिएट में 50 फीसदी से कम अंक आए हों या जो सबसे कम प्राप्तांक वाले विषय होंगे।

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