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‘वंदे मातरम’ और ‘जन गण मन’ बराबर नहीं माने जाएंगे: कोर्ट

गृह मंत्रालय ने कहा था कि ‘वंदे मातरम’ को ‘जन गण मन’ को बराबर मानने के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया जा सकता है

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दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के बराबर मानने का निर्देश देने की मांग करने वाली याचिका खारिज कर दी. ‘वंदे मातरम’ के रचनाकार बंकिम चंद्र चटर्जी हैं. कार्यवाहक चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस सी हरिशंकर की बेंच ने कहा कि हालांकि वह याचिकाकर्ता की राय से सहमत है, लेकिन वह मांगी गई राहत नहीं दे सकती.

 

पीठ ने कहा, ‘यद्यपि हम याचिकाकर्ता से सहमत हैं कि ‘वंदे मातरम’ को प्रतिवादी को ‘जन गण मन’ के बराबर मान्यता देनी चाहिए, लेकिन हमारी राय है कि हम याचिका में मांगी गई राहत देने में सक्षम नहीं हैं.’ अदालत का आदेश दिल्ली निवासी गौतम आर मोरारका की याचिका पर आया, जिसने बेंच से अनुरोध किया था कि वह केंद्र को इस संबंध में निर्देश दे ताकि जब ‘वंदे मातरम’ बजाया जाए या गाया जाए तो उचित गरिमा और सम्मान का खयाल रखा जाए.

केंद्र सरकार ने किया था विरोध

केंद्र ने याचिका का यह कहते हुए विरोध किया था कि ‘वंदे मातरम’ का भारतीयों के मानस में ‘अनोखा और विशेष स्थान’ है, लेकिन इसे नोबेल पुरस्कार से सम्मानित रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा लिखित ‘जन गण मन’ के बराबर नहीं माना जा सकता.

याचिका को खारिज करने की मांग करते हुए गृह मंत्रालय ने कहा था कि ‘वंदे मातरम’ को ‘जन गण मन’ को बराबर मानने के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया जा सकता है.

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