THE INDIANS

शादियों के बचे हुए खाने को जरूरतमंदों तक पहुंचाने वाले अंकित कवात्रा

Get Rs. 40 on Sign up

‘एक दिन मैं एक बड़े खानदान के विवाह समारोह में गया जहां 10 हजार लोगों को आमंत्रित किया गया था। यहां 35 किस्म के पकवान थे। मैं यह देखने के लिए वहां रूक गया कि बाद में बचे हुए भोजन का क्या होता है। यह देखकर मुझे बेहद दुख हुआ और ठेस पहुंची कि बचे हुए ढेर सारे भोजन को कूड़े में फेंक दिया गया।’

संस्था से जुड़े मेंबर्स विभिन्न रेस्टोरेंट और कैटरर्स से संपर्क में रहते हैं, ताकि उनके यहां बचे हुए खाना को गरीबों में बांटा जा सके़ पार्टी खत्म होते ही रात के 12 या एक बजे फाेन आ जाता है। बचे हुए खाना लेने के लिए मेंबर्स उसी समय निकल पड़ते हैं।

भारत में शादियां एकदम धूमधड़ाके से होती है, परिवारों के लिए अपने बच्चों की शादियां करवाना एक सपने जैसा होता है। माता-पिता सालों से अपने बच्चों की शादी के लिए तैयारी में लगे रहते हैं। शादी में कोई कसर न रह जाए इसके लिए वो ऐड़ी-चोटी का जोर लगा देते हैं। वो बढ़िया से बढ़िया डिजायनर बुलाते हैं, स्टेज सजवाकर एकदम राजमहल सा बना देते हैं, नामचीन केटरर्स से दस्तारखान सजवाते हैं। लेकिन जब इन शानदार शादियों की धूम खत्म हो जाती है तब लजीज व्यंजन का एक बहुत बड़ा हिस्सा बच जाता है। और वो इतना ज्यादा होता है कि केटरर्स की टीम भी उसे खपा नहीं पाती और वो सारा खाना डस्टबिन में फेंक दिया जाता है।

सोचिए जरा, आज भी जहां देश में एक तरफ करीब 20 करोड़ लोग हर रात भूखे पेट सोने को अभिशप्त हैं वहीं दूसरी ओर एक अनुमान के मुताबिक हर साल 58 हजार करोड़ रुपये का खाना शादी-विवाह और अन्य समारोहों में बर्बाद कर दिया जाता है। ये दोनों ही आंकड़े हर भारतीय को अचंभित करने वाले हैं। इस गंभीर समस्या पर ध्यान दिया दिल्ली के अंकित कवात्रा ने।

जब शुरुआत हुई इस अनोखी मुहिम की

अंकित के मुताबिक, एक दिन मैं एक बड़े खानदान के विवाह समारोह में गया जहां 10 हजार लोगों को आमंत्रित किया गया था। यहां 35 किस्म के पकवान थे। मैं यह देखने के लिए वहां रूक गया कि बाद में बचे हुए भोजन का क्या होता है। यह देखकर मुझे बेहद दुख हुआ और ठेस पहुंची कि बचे हुए ढेर सारे भोजन को कूड़े में फेंक दिया गया। उस रात इस बचे हुए भोजन से 5,000 लोगों का पेट भरा जा सकता था। उन्होंने इसकी शुरुआत फीडिंग इंडिया से 2014 में भूख और भोजन की बर्बादी के मसलों का हल निकालने के लिए की थी। तब उनके साथ महज पांच लोग जुड़े थे।

देखते-देखते फीडिंग इंडिया का जयपुर, कानपुर, पटना, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, भुवनेश्वर सहित 42 शहरों पर चैप्टर है। अब भारत के 43 शहरों में उनके संगठन से करीब साढ़े चार हजार स्वयंसेवक जुड़े हैं। वे शादी समारोह और पार्टियों से बचने वाले भोजन को जरूरतमंदों तक पहुंचाने में मदद करते हैं। उन्होंने रैन बसेरा जैसे आश्रय घर समेत कई गैर-सरकारी संगठनों के साथ भोजन बांटने के एक प्रभावी चैनलबनाने के लिए गठजोड़ किया है। बचे भोजन के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए 24 घंटे की एक हेल्पलाइन सेवा शुरू की गई है।

बस कोई भी भूखा न रह जाए

महज 22 वर्ष की उम्र में कॉरपोरेट की नौकरी छोड़ने वाले अंकित के मुताबिक, उन्होंने बचे हुए भोजन और भारत की भूख की समस्या से निपटने पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि भारत में किसी विवाह समारोह में जितना भोजन बर्बाद होता है उसे देखकर मैं चकित रह गया जबकि देश में 19.4 करोड़ लोग कुपोषित हैं। संगठन के पीछे का विचार किसी जलसे, कार्यक्रम और शादी के आयोजनों के दौरान अत्यधिक भोजन को एकत्र करना और इन्हें जरूरतमंद लोगों में वितरित करना है और अब एक भी व्यक्ति भूखा नहीं रहे यही इसका लक्ष्य है।

फीडिंग इंडिया के रांची चैप्टर को हेड कर रहीं सुखप्रीत कौर बताती है कि संस्था से जुड़े मेंबर्स विभिन्न रेस्टोरेंट और कैटरर्स से संपर्क में रहते हैं, ताकि उनके यहां बचे हुए खाना को गरीबों में बांटा जा सके पार्टी खत्म होते ही रात के 12 या एक बजे फाेन आ जाता है। बचे हुए खाना लेने के लिए मेंबर्स उसी समय निकल पड़ते हैं। मेंबर्स इस खाना की जांच करते हैं। इन्होंने रेस्टोरेंट व कैटरर्स को डब्बा भी दिया है, ताकि बचे हुए खाना को इसमें रख सकें। इस खाना को सुबह छह बजे से आठ बजे के बीच विभिन्न जगहों पर बांटा जाता है। सुबह में खाना बांटने से पहले भी इसकी जांच करते हैं। खाना खराब हो जाता है, तो उसे फेंक देते हैं। अंकित और फीडिंग इंडिया के प्रयास समाज में एक नई भावना का संचार कर सकते हैं।

यूएन कर चुका है सम्मानित

अंकित के इस योगदान को संयुक्त राष्ट्र के कार्यक्रम से पहचान मिली। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र ने उन्हें टिकाऊ विकास लक्ष्य के लिए यूएन युवा नेतृत्व के औपचारिक दल में शामिल किया है। गरीबी, विषमता और अन्याय के खिलाफ लडऩे और साल 2030 तक जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में योगदान और नेतृत्व क्षमता के लिए पूरी दुनिया से 17 युवाओं को चुना गया है। भुखमरी रोधी कार्यकर्ता अंकित क्वात्रा को यहां बकिंघम पैलैस में एक समारोह में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने वर्ष 2017 के लिए यंग लीडर्स अवार्ड दिया।

अंकित के मुताबिक, महारानी से बकिंघम पैलैस में यह पुरस्कार मिलना बड़ा सम्मान है। कुछ ऐसा जिसका मैं सपना तक नहीं देख सकता था। मेरा मानना है कि यह दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है खासतौर से तब जब ब्रिटेन और भारत का कई सारे मोर्चों पर साझा इतिहास है। बकिंघम पैलैस में एक भारतीय की मौजूदगी आज इस बात को दर्शाती है कि दोनों देश कितने लंबे रास्ते तय कर चुके हैं और एक बार फिर यह साबित हो गया कि अगर हम शांतिपूर्ण तरीके से साथ मिलकर काम करें तो हम कितना कुछ कर सकते हैं।

Write your Comments here

comments

Show More
रहें चौबीसो घंटे बिहार और देश दुनिया की ख़बरों से अपडेट, फेसबुक पेज जरुर लाइक करें

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Close