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शाबाश! बांका में आंखों से लाचार बेटियां सीख रहीं आत्मरक्षा के गुर

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भगवान ने भले ही इन मासूम बच्चियों की आंखें छीन ली हों लेकिन इनका मनोबल किसी से कम नहीं है। आंखों से भले ही उन्हें नहीं दिख रहा है लेकिन वे अपनी रक्षा के लिए कराटे का हुनर सीख रही हैं। जी हां यहां बात हो रही है  कस्तूरबा विद्यालय बांका की। इस स्कूल में पढ़ने वाली 10 छात्राएं इन दिनों कराटे का प्रशिक्षण ले रही हैं। इनके इस हुनर सीखने की ललक ऐसी है कि हर रविवार को वे प्रशिक्षक का बेसब्री से इंतजार करती हैं। बांका कस्तूरबा विद्यालय की अधिकतर छात्राओं को कराटे की ट्रेनिंग दी जा रही है।

कराटे प्रशिक्षक निलेश ने स्कूल की 10 नेत्रहीन छात्राओं को कराटे सीखने के लिए प्रोत्साहित किया। निलेश के प्रयास ने रंग लाया तथा स्कूल की 10 नेत्रहीन छात्राएं कराटे सीखने को तैयार हो गईं। इन छात्राओं को हर रविवार को ट्रेनिंग दी जाती है। प्रशिक्षक ने बताया कि इन छात्राओं में कराटे के प्रति काफी जुनून है। इन्हें कराटे का प्रशिक्षण देने में थोड़ी परेशानी तो होती है लेकिन इनके सीखने की ललक से इन्हें सिखाने में काफी मजा आता है। उन्होंने बताया कि लड़कियों को आहट पर पंच मारने का प्रशिक्षण देते हैं।

हालांकि प्रशिक्षण का प्राथमिक दौर चल रहा है लेकिन इन्हें कई प्रकार के गुर सिखाए जा चुके हैं। छात्राओं का कहना है कि भले दुनिया नहीं दिख रही लेकिन हमलोग पढ़ाई के साथ-साथ कराटे सीखकर आत्मरक्षा तो कर ही सकते हैं। इधर, नेत्रहीन छात्राओं के प्रभारी शिक्षक मुकेश कुमार ने बताया कि इन नेत्रहीन लड़कियों को कराटे सिखाना नया प्रयोग है।

भविष्य में ये छात्राएं अन्य नेत्रहीन छात्राओं के लिए प्रेरणा बन जाएंगी। उन्होंने कहा कि शायद बिहार का यह पहला जिला होगा जहां नेत्रहीन छात्राओं को कराटे का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मुकेश ने बताया कि इससे उन्हें आत्मसंतुष्टि मिलती है।

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