YMB inbox Interview

शार्ट फ़िल्म “भोर” भोजपुरी समाज को भोजपुरी पर गर्व करने का मौका देती है

YMB inbox Interview। जीवन को बदलने वाली, सामाजिक संदेश देती हुई, भावनात्मक बनाती हुई। 'भोर"

Get Rs. 40 on Sign up

भोजपुरी फ़िल्म. शब्द सुन कर आपके दिमाग मे सबसे पहले क्या आता है ? अश्लीलता ! है न. सभी के दिमाग मे यही बात आता है. मेरे आपके भोजपुरी न सुनने वालों के भी. लेकिन यह हमारी मातृभाषा है. हमारी पहचान है. हमारी पहली ज्ञान है.

दरअसल भोजपुरी भाषा अश्लील नहीं है बल्कि आज के दौर में पैसे के लिए कुछ लोगों ने इसे अश्लील रूप से पेश किया. और ये कुछ लोगों की संख्या में दिनों दिन बढ़ोतरी होती जा रही है. जो कि भोजपुरी के वर्तमान और भविष्य के लिये खतरा है. बात मात्र भूमि से जुड़ी है. बात मातृ भाषा की है. तो कैसे इसको बचाने के लिए कोई न जागे. कैसे कोई भोजपुरी को सिर्फ अश्लील तस्वीरों में ढलते देख पाए. भोजपुरी को बचाने की मुहिम शुरू हो चुकी है.बस इसे इन्टरनेट से लेकर जमीनी स्तर पर लाने की जरूरत है ।
आज आपको भोजपुरी भाषा को भोजपुरी के अलसी रंग यानी मीठ भोजपुरी बोली, अश्लील रहित भोजपुरी  वाले एक शार्ट फ़िल्म के बारे में बताने वाले  हैं. फ़िल्म का नाम ‘भोर” है । फ़िल्म काफ़ी जमीनी स्तर पर बनी है. ये फ़िल्म उन सभी किसानों के कहानी से मिलती है जो कर्ज तले लाचार है. जिनका एक ही कहना होता है. बस अब मर जाना. आगे की कहानी के लिए नीचे स्क्रोल कर फ़िल्म देखिये । यह फ़िल्म यूट्यूब पर पुरुआ चैनल द्वारा 17/12/2017 को रीलिज किया गया. तो आइए आपको मिलाते हैं, फ़िल्म के कास्ट और क्रू के साथ.
film poster- PURUA

कुनाल जी हमारे पाठकों को आपके बारे में कुछ बताएं-

मैं बिहार के सिवान से हूँ. अभी बंगलोर में डेलीहंट में जनरल मैनेजर के तौर पर कार्यरत हूँ,
मैं खुद एक पब्लिश्ड नावेल का लेखक हूँ. मेरी पहली नॉवेल “Love was never Mine” बेस्ट सेलर रह चुकी है । और आज भी अमेज़न, फ्लिपकार्ट, क्रोसवर्डस और अन्य वेबसाइट्स पर टॉप सैलिंग लिस्ट में आती है.

कुनाल

इस फ़िल्म का आईडिया कैसे आया ?

ये शार्ट फ़िल्म मेरी एक पांच साल पहले लिखी शार्ट स्टोरी “Suicide” पर आधारित है, जिसे मैंने डेलीहंट पर प्रकाशित किया था । हुआ कुछ ऐसा की मैने सुसाइड को भोजपुरी में अनुवाद कर के हमारे पुरुआ के फेसबुक पेज पर पोस्ट किया, लोगों ने उसे पढ़ा. पसंद आया उन्हें. कमैंट्स, मैसेज में सभी के प्रतिक्रिया आने लगे कि इस लेख पर फ़िल्म बननी चाहिए ताकि लोगों को एक सकारात्मक सामाजिक संदेश बेहतरीन ढंग से जाए।

FILM SCENE

फ़िल्म के कास्ट और क्रू के बारे में हमारे पाठकों को कुछ बताएं ।

– इस फ़िल्म को उज्जवल पांडेय ने निर्देशित किया है. उज्जवल पहले कोहबर जैसी बेहतरीन भोजपुरी शार्ट फिल्में बना चुके हैं, जो काफी चर्चित भी रही है. उज्ज्वल बनारस के हैं और मुख्यतः बनारस में ही रहते हैं. उज्ज्वल कहते हैं कि लोग मुम्बई के बदले भोजपुरी और हिंदी फिल्मों की शूटिंग बनारस महादेव नगरी में आएं, बल्कि ये उज्जवल के सपने जैसा है, जिसे वो पूरा करने में लगे हुए हैं. उज्ज्वल चाहते हैं कि फ़िल्म प्रोडक्शन से संबंधित सारी सुविधाएं बनारस में ही उपलध हो ।

फ़िल्म में अभिनेता

उज्ज्वल ने एक डायरेक्टर के तौर पर इस फ़िल्म की कहानी के साथ पूरा न्याय किया है। इस फ़िल्म के मुख्य किरदार हरीश पाल हैं जिनके चेहरे के भाव बहुत कुछ बोलते हैं। हरीश का किरदार एक बेहतरीन अभिनय का परिचय कराता हुआ दर्शकों को जरूर भायेगा ।

फ़िल्म में एक रोल है, बूढे व्यक्ति का. जिसे रंगमंच के जाने माने कलाकार अनूपम झा जी ने बखूबी निभाया है. अनुपम जी की लिखी किताब ” भारतीय सिने सिद्धांत ” हर फिल्ममेकर के लिए बाइबिल जैसी मानी जाता है.

 

अन्य कलाकार मनिषा राय जो कि पत्नी के किरदार में हैं, शालू कुशवाहा बेटी के रूप में, संजीव मिश्रा एक मकान मालिक के रूप में, सतीश पाण्डेय बूढ़े आदमी के बेटे बने हुए हैं ।

FILM SCENE

संगीत

– फ़िल्म का टाइटल गीत राहुल मानी त्रिपाठी जी के स्वर में है. जो कि भोजपुरी में सभ्य गीतों के बड़े गवईया हैं. राहुल देवरिया  से हैं. राहुल जी का भी भोजपुरी के प्रति एक ही मकसद है. भोजपुरी को दर्शकों के सामने भोजपुरी के असल रंग में पेश करना. भुजपुरी को अश्लीलता मुक्त बनाना ।

इस गीत में राहुल जी के साथ महिला स्वर सेजल ने दिया है. जो कि अभी गायिकी में नई हैं. और बहुत अच्छा कर रही हैं. सेजल का चयन हाल ही में उज्जवल द्वारा बनारस में लिए गए ऑडीशन के दौरान हुआ था ।
फ़िल्म के दूसरे गीत ” भीखूआ” को हिमांशु दुबे ने गाया है । फ़िल्म में बैकग्राउंड स्कोर काफी बढ़िया है, सस्पेंस क्रिएट करता है. जिसे दिया है पूजा मिश्रा और राज त्रिपाठी ने।

FILM SCENE

फ़िल्म द्वारा समाज को क्या संदेश पहुँचेगा ?

फ़िल्म हर व्यक्ति को जीवन जीने का एक नया नज़रिया सिखाएगी. मुसीबत आने पर पलायन के बजाय उस मुसीबत से दो-दो हाथ लड़ने का हौसला देगी.
कई कारणों से लोगों को जो आत्महत्या के बारे में सोचते हैं उन्हें जिंदा रहने का नया बहाना बताएगी ।

Write your Comments here

comments

Show More
रहें चौबीसो घंटे बिहार और देश दुनिया की ख़बरों से अपडेट, फेसबुक पेज जरुर लाइक करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Close