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शिक्षा विभाग की पहल : घर बैठे देख सकेंगे बच्चे स्कूल गए या नहीं, शिक्षक गायब तो नहीं

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बिहार सरकार शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने में लगी है. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सरकार आये दिन नए प्रयोग भी कर रही है. छात्रों और अभिभावकों को सुविधा मिले. इसकी पुरजोर कोशिश हो रही है. इसी क्रम में अब शिक्षा विभाग ने तय किया है कि इस विभाग का एक अलग पोर्टल होगा. इसमें विभाग से जुड़े राज्य भर के अधिकारी के साथ-साथ स्कूल, शिक्षकों और छात्रों के बारे में सभी जानकारियां उपलब्ध रहेंगी. इस पोर्टल के जरिये लोग आसानी से संबंधित अधिकारी से लेकर स्कूल के बारे में जानकारी ले सकेंगे.

किसी स्कूल में कितने शिक्षक हैं और कितने आते हैं, घर बैठे लोग इसे देख सकेंगे. अगर कोई शिक्षक लंबे समय से स्कूल नहीं आ रहे हैं तो प्रधानाध्यापक से इसके बारे में पूछा जा सकेंगे. वहीं कौन शिक्षक कितनी शैक्षणिक योग्यता रखते हैं और उनका योगदान कब हुआ है, यह सब कुछ उस पोर्टल में मिल जायेगा. इसके अलावा स्कूल में नामांकित बच्चों की भी संख्या कितनी है और कितने को सरकारी योजनाओं (पोशाक, साइकिल, छात्रवृत्ति व मध्याह्न भोजन) का लाभ मिल रहा है, यह देख सकेंगे.

इस नये पोर्टल को तैयार करने की कवायद शिक्षा विभाग ने शुरू की है. इसमें प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक शिक्षा से जुड़ी सभी चीजें जिलावार पब्लिक डोमेन में उपलब्ध रहेगी. शिक्षा विभाग के अधिकारी किसी स्कूल में जाते हैं उन्हें पहले से यह जानकारी नहीं होती है कि उस स्कूल में कितने शिक्षक काम करते हैं और कितने स्टाफ हैं.

शिक्षा विभाग के नये पोर्टल आने से निरीक्षण से पहले इसमें वे जानकारी उपलब्ध कर सकते हैं. साथ ही विभाग को बार-बार शिक्षकों के खाली पदों की संख्या जिलों से मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इस पोर्टल के जरिये ही शिक्षकों के कार्यरत और खाली पदों को विभाग एक साथ देख सकेगा और उन पदों के लिए नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी. अधिकारी से स्कूल, शिक्षकों व छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों के खाली पदों को मांगने की जरूरत नहीं होगी. शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता के साथ-साथ वे स्कूल आते हैं या नहीं इसका भी पता चलेगा.

अधिकारियों को जोड़ नये पोर्टल की होगी शुरुआत शिक्षा विभाग के नये पोर्टल में सबसे पहले अधिकारियों को जोड़ा जायेगा. इसमें शिक्षा विभाग से जुड़े मुख्यालय से लेकर प्रमंडल, जिला, प्रखंड स्तर के अधिकारी शामिल होंगे. इसके बाद इसमें जिलावार स्कूलों, शिक्षकों व छात्रों का आंकड़ा जोड़ा जायेगा. इसकी जिम्मेदारी संबंधित जिलों को दी जायेगी.

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