citizen updates

सदियों से दहेज मुक्त है बिहार का यह समाज

Get Rs. 40 on Sign up

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गांधी जयंती के अवसर पर बाल विवाह और दहेज रूपी कुप्रथा को खत्म करने के लिए व्यापक अभियान चलाया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिहार का एक ऐसा भी ब्राह्मण समाज है जहां दहेज का नामों निशान तक नहीं है। यहीं कारण है कि यहां के शादी समारोह में फिजूल खर्च दिखने को नहीं मिलता है।

वरिष्ठ पत्रकार कुमुद सिंह की मानें तो बिहार में अपराध की तरह ही एक और अतिवाद दुनिया में है कि मिथिला में ब्राम्‍हण अपने बेटे को बेचते हैं। ऐसा नहीं है। दरअसल मिथिला में ब्राम्‍हण में पांच प्रकार के समाज है। श्रोत्रिय, योग, जेबार, पंजीबद्ध और दोगमिया। तीन समाज में जहां अभिशाप बन चुका है वहीं एक समाज दहेज से प्रभावित है तथा एक आज भी दहेज मुक्‍त है। वैसे मिथिला में कर्ण कायस्थ का भी एक बड़ा वर्ग है जो बिना दहेज विवाह करता है।

सौ फिसदी शिक्षित श्रोत्रिय समाज में आज भी विवाह सौ फीसदी कर्मकांड के आधार पर होता है। लगन के बजाय लग्‍न में विवाह करने के कारण इस समाज में दिन और रात दोनों समय पर विवाह किया जाता है। कन्‍यादान के उपरांत विवाह यज्ञ के कारण वर मुंडन कराता है। न जयमाल होता है और न ही मांस-मछली का भोज। नाच-गाना तो दूर की बात। विवाह पद्धति के मामले में इस समाज ने अब तक कोई संशोधन या नवीनीकरण नहीं किया है। जिसके कारण 50 साल पुरानी तस्वीर हो या हाल की, एकरूपता नजर आती है।’

इन कुछ तसवीरों से इनके बीच का अंतर आप खुद समझ जाएंगे। किन्तु मेरा मानना है कि इसमें एकरुपता लाया जाये, सादगी और दहेज मुक्ति को संरक्षित किया जाये। आज हमारा समाज आडम्बर पर बहुत खर्च करता है। अपनी हैसियत दिखाने के लिए अनाप-सनाप खर्च करता है। इन तसवीरों में राजा से रैयत तक के विवाह की तस्‍वीरें हैं, सादगी ऐसी की फर्क करना मुश्किल है। आज जरुरत है सादगी दिखाकर बड़प्पन जाहिर करने की। कुछ तसवीरों में दक्षिण भारत के लोगों को हो सकता है अपनापन लगे।

Write your Comments here

comments

Show More
रहें चौबीसो घंटे बिहार और देश दुनिया की ख़बरों से अपडेट, फेसबुक पेज जरुर लाइक करें

Related Articles

Close