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समान नागरिक संहिता पर जदयू का विरोध जारी, मुद्दे पर राय देने से भी इनकार

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बिहार के मुख्यमंत्री भले ही सर्जिकल स्ट्राइक और नोटबंदी पर मोदी सरकार को अपना समर्थन दिया हो लेकिन समान नागरिक संहिता पर वो और उनकी पार्टी सरकार के विरोध में खड़ी दिख रही है. मुख्यमंत्री की राय पर सहमति जताते हुए जदयू ने इस मुद्दे पर पार्टी की राय तक देने से इनकार कर दिया है.

जदयू ने जोर देकर कहा कि आम सहमति के अभाव में इसे लागू करने से ‘सामाजिक अशांति’ पैदा होगी. साथ ही संसद, विधानसभाओं और अन्य मंचों पर चर्चा के जरिए इस मुद्दे पर पहले आम सहमति बनाने की अपनी मांग भी रख दी.

जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधि आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति बी एस चौहान और केंद्र को पत्र लिखकर अपनी पार्टी की राय से अवगत कराया.

 

उन्होंने सुझाव दिया कि आयोग को जल्दबाजी में यूसीसी लागू नहीं करना चाहिए. कुमार ने पत्र में कहा, ‘अल्पसंख्यकों समेत विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच आम सहमति बनाए बिना किसी भी स्थिति में यूसीसी लागू करने से सामाजिक अशांति पैदा होगी और धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी में आस्था कम होगी.’ यूसीसी लागू करने से पहले सभी हिस्सेदारों के बीच चर्चा का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा, ‘यह वांछनीय है कि केंद्र के समान नागरिक संहिता बनाने की दिशा में आगे बढ़ने की सोचने से पहले विभिन्न कानूनों को निरस्त करने और उसे यूसीसी से बदलने से पहले इस विषय को संसद और विधानसभाओं और समाज क अन्य मंचों पर विस्तृत चर्चा के लिए रखना चाहिए.’

बिहार सरकार ने 10 जनवरी को राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने के बाद औपचारिक तौर पर विधि आयोग को इस संबंध में पत्र लिखा था. नीतीश कुमार की राय से सहमति जताते हुए जदयू ने भी आयोग के सवालों का जवाब देने में अक्षमता जाहिर की. उसने कहा कि इसे खास जवाब हासिल करने के लिए एक खास तरीके से तैयार किया गया है.

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