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सिमरिया धाम में तुलार्क महाकुम्भ का नीतीश ने किया ध्वजारोहण, 1400 वर्ष पूर्व हर्षवर्द्धन ने की थी शुरुआत

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मगध, मिथिला व अंग की संगम स्थली सिमरिया धाम में जुटे देशभर के सैकड़ों साधु-संतों की मौजूदगी में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को तुलार्क महाकुम्भ का विधिवत ध्वजारोहण किया। इसके बाद धर्म सभा के मंच से तमाम साधु-संतों ने शराबबंदी की मुक्तकंठ से सराहना की। शराबबंदी को भारत को फिर से विश्वगुरु बनाने की पहली कड़ी बताने से आह्लादित नीतीश ने अब नशामुक्ति को अपना लक्ष्य बताया। इसका भी साधु-महात्माओं के साथ ही लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट से समर्थन किया।

देशभर से आये महात्माओं व कुम्भ सेवा समिति के महासचिव और एमएलसी रजनीश कुमार की तुलार्क महाकुम्भ को सरकारी मान्यता देने की मांग पर मुहर लगाते हुए सीएम ने कहा कि अगर धर्मगुरुओं को यह मंजूर है तो बिहार सरकार इसे बुलंदियों पर पहुंचाएगी। सरकार वह सारी व्यवस्था करेगी, जो यहां आने वालों की जरूरत होगी। मैं तो यह चाहूंगा कि यहां आने वाले लोग बिहार की बदली छवि का बेहतर अनुभव लेकर लौटें। सीएम ने कहा कि लोग प्राचीन काल से ही इस पावन धरती को मुक्ति धाम और स्वर्ग धाम मानते थे। सरकार के साथ मिलकर यहां के लोगों को फिर से ऐसा करना होगा कि इसके गौरव की फिर से स्थापना हो।

पांचवें कुम्भ का देते हैं मान्यता

हरिद्वार से आये स्वामी प्रबोधानंद गिरि जी महाराज ने नीतीश की शासन प्रणाली की सराहना करते हुए उन्हें आन, बान और शान का प्रतीक बताया। कहा कि साधु समाज तुलार्क महाकुम्भ को मान्यता देता है। द्वादश कुम्भ में इसे देश के पांचवें महाकुम्भ का दर्जा होगा। उन्होंने सीएम को नीतीश जी महाराज कहके संबोधित किया। यह भी कहा कि वे (नीतीश कुमार) अपने कर्मों की बदौलत इस नाम के हकदार हैं।

संत और भगवंत में कोई अंतर नहीं : स्वामी चिदात्मन

सिमरिया धाम के प्रमुख स्वामी चिदात्मन जी महाराज ने कहा कि संत और भगवंत में कोई फर्क नहीं है। कोई वैराग्य होकर लोगों की भलाई की सोचता है तो कोई इससे दीगर रहकर भी महात्माओं का आचरण धारण करते हुए सेवा धर्म का निर्वहन करता है।

1411 साल बाद सिमरिया धाम में फिर से महाकुम्भ शुरू

ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार राजा हर्षवर्द्धन ने सिमरिया धाम में वर्ष 606 में महाकुम्भ शुरू कर प्रजा के कल्याण की कामना की थी। वर्ष 2017 के धनतेरस के दिन तुलार्क महाकुम्भ को 1,411 साल बाद जागृत किया गया।

धर्मगुरुओं ने कहा कि अनादि काल से अध्यात्म की इस धरती पर कुम्भ न केवल राष्ट्रीय, अपितु वैश्विक मानवता को सन्मार्ग पर प्रेरित करने वाला महापर्व होता है। लेकिन राष्ट्रीय सांस्कृतिक व सामाजिक समरसता का यह केन्द्र कालचक्र का शिकार होकर कुण्ठित हो गया है। इसे महाकुम्भ के माध्यम से फिर से जागृत करने के उद्देश्य से महाकुम्भ का आयोजन किया गया है।
सदियों से प्रतिष्ठित है मुक्ति धाम के रूप में
धर्म सभा में सीएम नीतीश ने कहा कि सदियों से सिमरिया मुक्ति धाम के रूप में प्रतिष्ठित है। वर्ष 2011 में कुछ लोगों ने इसके संबंध में विवाद उत्पन्न किया। लेकिन अब फिर से जागृत हो गया है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक इसी स्थल पर समुद्र मंथन हुआ था।
फिर से पावन धरती पर जुटेंगे करोड़ों श्रद्धालु
स्वामी चिदात्मन जी महाराज ने कहा कि राजा हर्षवर्द्धन के बाद दूसरा नाम सीएम नीतीश कुमार का ही कालजयी स्वर्णक्षारों में अंकित होगा। फिर से यह स्थान पवित्रता के साथ पूजा जाएगा। लोगों की आस्था बढ़ेगी। सर्वधर्मसम्भाव पनपेगा। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था जगेगी।

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