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19-20 साल के इन दो लड़कों ने कहा, आइये करें कोसी के सवालों पर बात

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बाढ़, पलायन, अशिक्षा और भीषण गरीबी से जूझने वाला कोसी क्षेत्र हर साल मानसून के सीजन में मीडिया की सुर्खियां बटोरने लगता है. अचानक कई कोसी विशेषज्ञ सामने आ जाते हैं. बाढ़ का पानी जब तक गांवों को डुबोता रहता है, कोसी चर्चा भी तभी तक होती है. बाढ़ का पानी उतरते ही मीडिया से कोसी चर्चा भी उतर जाती है. कभी ऐसा नहीं होता कि लोग एकजुट होकर बतियायें कि कोसी क्षेत्र की यह हालत क्यों है? इसका समाधान क्या है? अगले साल पहली दफा यह काम होने जा रहा है और दो बहुत कम उम्र के युवाओं ने इस काम का बीड़ा उठाया है. ये हैं पत्रकारिता के छात्र 19 साल के सोमू आनंद और एलएलबी के छात्र 20 साल के अभिनव नारायण. इन दोनों ने तय किया है कि इन्हीं मसलों पर अगले साल कोसी कूटनीतिक शिखर सम्मेलन आयोजित करेंगे. इन्हें सलाम कीजिये और जानिये कि इनकी योजनाएं क्या हैं.

सोमू आनंद और अभिनव नारायण

(अभिनव नारायण एमिटी स्कूल ऑफ लॉ से एलएलबी तृतीय वर्ष के छात्र हैं. सोमू आनंद पटना कॉलेज से पत्रकारिता प्रथम वर्ष के छात्र. दोनों मूल रूप से सहरसा के रहने वाले हैं.)

सोमू आनंद
अभिनव नारायण

नीति निर्धारण में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने एवं संसदीय कार्यवाही से उन्हें अवगत कराने के लिए भारत में युवा संसद जैसे आयोजनों की बड़ी भूमिका रही है. अक्सर देश-प्रदेश की राजधानी में आयोजित होने वाले यह कार्यक्रम अब छोटे शहरों की ओर बढ़ने लगे है. संसाधनों की कमी से जूझने वाले कोशी क्षेत्र में ऐसा ही एक आयोजन मई में होने जा रहा है.

कई युवा संसद में हिस्सा लेने के बाद हमने महसूस किया कि ऐसे आयोजनों में बड़े शहरों के युवाओं की ही भूमिका रहती है. छोटे शहर एवं गांव के युवाओं को उनके विचार प्रकट करने का कोई मंच नहीं मिल पाता है. इसलिए हमने ‘कोशी कूटनीति शिखर सम्मेलन’ आयोजित करने का फ़ैसला किया.
दो दिवसीय आयोजन में लोकसभा, राज्यसभा एवं बिहार विधानसभा की समितियां बनेंगी. जिसमें संसद के तर्ज़ पर चर्चा होगी. सम्मेलन में कोशी, मिथिलांचल, सीमांचल के छात्र-युवा भाग लेंगे एवं विभिन्न मुद्दों जैसे – ग्रामीण भारत की समस्याएं एवं समाधान, नशामुक्त समाज, आधी आबादी का उत्थान के साथ-साथ स्थानीय समस्याएं जैसे – विस्थापन, बेरोजगारी, बदहाल शिक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर पर चर्चा करेंगे. चर्चा से सामने आए महत्वपूर्ण सुझावों को सरकार को प्रस्ताव के रूप में भेजा जाएगा.

कार्यक्रम में मैथिली भाषा के प्रभाव एवं प्रसार पर परिचर्चा के लिए एक विशेष सत्र आयोजित होगा. जिसमें मैथिली भाषा के युवा साहित्यकारों को आमंत्रित किया जाएगा. जिससे वो बदलते परिवेश में मैथिली भाषा की प्रासंगिकता एवं तकनीक के सहारे प्रसार के बारे में युवाओं से चर्चा करें. विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान देने वाले ऐसे लोग जिन्हें अभी तक क्षेत्र नहीं जान पाया है अथवा ऐसे लोग जिनके काम से पूरे समाज को लाभ पँहुच रहा है उन्हें सम्मानित भी किया जाएगा. सम्मेलन में संबंधित विषयों के विद्वान, केंद्र एवं राज्य सरकार के प्रतिनिधि, नौकरशाह एवं पत्रकारों को आमंत्रित किया जाएगा.

दो दिवसीय आयोजन में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों के रहने-खाने की व्यवस्था आयोजन समिति ही करेगी. सर्वश्रेष्ठ प्रतिभागियों को प्रतीक चिन्ह एवं नकद पुरस्कार दिया जाएगा.

सहरसा में इस प्रकार का आयोजन करना एक कठिन फैसला था. क्योंकि इतने बड़े आयोजन में आर्थिक सहयोग मिलना एक चुनौती थी लेकिन कुछ शिक्षण संस्थानों एवं स्थानीय लोगों ने मदद का भरोसा दिलाया तो हमारा मनोबल बढ़ा है. रोज कुछ नए लोग सहयोग एवं सुझाव के साथ जुड़ रहे हैं जिससे एक सफल आयोजन का मार्ग प्रसस्त हो रहा है.

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