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Patna: LIC के चेयरमैन विजय कुमार शर्मा को मातृ शोक

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​भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के चेयरमैन बने ‘ब्रांड बिहार’ के बड़े द्योतक विजय कुमार शर्मा के घर में शोक का माहौल है. विजय कुमार शर्मा की माता राजकुमारी देवी (83 वर्ष) बैकुंठधाम को चली गयी हैं. माताजी पटना के ही पटेल नगर के रोड नंबर-6 में रहती थीं. माताजी की मृत्यु से दुखी चेयरमैन विजय कुमार शर्मा पटना आये हुए हैं. अपने पिता सत्य नारायण सिंह के साथ मां की यादों को साझा कर रहे हैं. श्राद्ध कर्म पटना में ही 10 जनवरी को होगा.

राजकुमारी देवी ने तीन पुत्र रत्न दिये. पहले पुत्र अशोक कुमार बिहार की सेवा में थे. सार्जेंट पद से रिटायर हुये. दूसरे पुत्र विजय कुमार शर्मा की पहचान ‘फलक’ पर किसी भी परिचय से अधिक बड़ी है. वे चेयरमैन बनने के पहले से ही LIC की दुनिया में सबसे बड़े क्राइसिस मेनेजर के रूप में जाने जाते रहे हैं. विजय कुमार शर्मा के रूप में इस ‘ब्रांड बिहार’ को ऐसे समझें कि जब टाटा कंपनी में उठापटक का दौर शुरू होता है, तो रतन टाटा सबसे पहले LIC के मुंबई हेडक्वार्टर में विजय कुमार शर्मा से ही मिलने जाते हैं. बिहार के हैं, तो बिहार के प्रति प्यार तो है ही. पटना की महत्वकांक्षी मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट के लिये भी LIC भरपूर आर्थिक मदद को तैयार है.


राजकुमारी देवी के सबसे छोटे पुत्र विनय कुमार भी LIC में ही हैं. डिविजनल मैनेजर के पद पर मुंबई में ही पदस्थापित हैं.
गांव को आज भी नहीं भूलते हैं शर्मा
विजय कुमार शर्मा का गांव पटना जिले के नौबतपुर के परसा में है. पिताजी सत्यनारायण सिंह ने भारतीय रेल को लंबे समय तक अपनी सेवाएं दी. वे दानापुर में DRM कार्यालय में थे. स्कूली शिक्षा-दीक्षा गांव के माहौल में ही हुयी. फिर पटना साइंस कॉलेज आ गये. 1980 में पढने को दिल्ली के JNU में चले गये.
ऐसे आ गये शर्मा LIC में 
चेयरमैन विजय कुमार शर्मा को जानने वाले JNU के सहपाठी बताते हैं कि LIC में इनका जाना महज संयोग था. वे JNU में और पढ़ना चाहते थे. अव्वल तो थे ही. हुआ ऐसा कि एक दिन प्रोफ़ेसर साहब ने प्रतियोगी परीक्षाओं में नहीं शामिल हो रहे छात्रों को बुलाया. विजय शर्मा ने कहा- अभी हमें और पढ़ना है. तब प्रोफ़ेसर ने कहा कि समझ गये, तुमलोग जिन्दगी में कुछ करना नहीं चाहते. इसलिये कम्पटीशन से भाग रहे हो. प्रोफ़ेसर साहब की झिड़की विजय समेत कई छात्रों को लग गयी. सबों ने इकट्ठे कई प्रतियोगी परीक्षाओं के फॉर्म भर दिये.

विजय शर्मा ने भी कई परीक्षाएं दी. सबों के रिजल्ट आ रहे थे. सबमें सफलता थी. लेकिन सबसे पहला इंटरव्यू LIC में ही हुआ और यहां APO के पद पर उनकी नियुक्ति कन्फर्म हो गयी. इसके बाद विजय ने कहा, बाकी को छोड़ो. फिर उनकी उड़ान तेज, और तेज होती गयी. परिणाम कि आज वे LIC के चेयरमैन पद को विराज रहे हैं. लेकिन, अहंकार अब भी कहीं नहीं है. बिहार, गांव और पुराने दोस्तों के प्रति प्रेम उतना ही गाढ़ा है.

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