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Video: पर्यावरण बचाने की अनोखी मुहिम, बेकार पॉलीथीन से बनाती हैं डोरमैट

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मैं सुमित्रा देवी बिहार के नवादा जिला में रहती हूं. बागवानी करना मेरा शौक है. तुलसी के पौधे मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं. इसकी माला बनाकर घर में रखना और लोगों को उपहार को रूप में देना काफी अच्छा लगता है.

पति के रिटायरमेंट के बाद हमलोग नालंदा जिले में अपने गांव आ गए. साल 2001 में उनके देहांत के बाद मैं अपने बच्चों के साथ जीवन संवारने की कोशिश करने लगी. बेटियां शादी के बाद सुसराल चली गईं. मेरे दो बेटे पंकज और चंचल भी बीमारी के कारण हमें छोड़कर चले गए. गांव में दोनों बहूओं के साथ रहने लगी. कुछ समय बाद छोटी बहू पूनम नवादा में एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने लगी और उसके कहने पर मैं भी साथ रहने लगी.

पति और दोनों बेटों की मौत के बाद मन नहीं लगता था, लिहाजा बागवानी कर समय काटने लगी. इस दौरान मुझे भारी तादाद में जमीन में दबे पॉलीथीन मिलने लगे. मैं ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं हूं, लेकिन इतनी समझ है कि यह पर्यावरण के लिए काफी नुकसानदायक है.

मैंने इन बेकार पॉलीथीन से डोरमैट बनाना शुरू किया. घर के साथ-साथ आसपास के लोगों को भी यह खूब पसंद आया. अब बागवानी के साथ बेकार पॉलीथीन से डोरमैट बनाना मेरी दिनचर्या का हिस्सा बन गया. गली-मोहल्लों में बेकार पड़े पॉलीथीन को एकत्रित कर मैं इसे सुंदर डोरमैट बनाकर लोगों के बीच मुफ्त में बांटती हूं. इस काम से पर्यावरण को साफ रखने में मदद कर पा रही हूं.

एक डोरमैट छोटे-बड़े 150 से 200 पॉलीथीन से कई दिनों में तैयार होता है. पॉलीथीन को जमा करने के बाद इसे साफ करती हूं. मेरे अपील पर आसपास के लोग पॉलीथीन को कुड़े में न फेंककर मेरे घर पहुंचा देते हैं और मैं उन्हें उसके बदले सुंदर डोरमैट बनाकर देती हूं.

मेरी इस कला में कुछ खास नहीं है. लेकिन आसपास की लड़कियां इससे प्रभावित हो रही हैं. खाली समय में डोरमैट बनाना सीख रही हैं. मैंने इसी काम को अब अपने जीने का मकसद बना लिया है. 80 साल की उम्र में मुझे इस बात की संतुष्टि है कि मैं पर्यावरण के लिए कुछ योगदान कर पा रही हूं. नवादा शहर में पॉलीथीन आमतौर पर सड़कों पर बिखड़े पड़े दिख जाते हैं. इसे खाकर बेजुबान जानवरों की मौत हो रही हैं.

मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान से काफी खुश और प्रभावित हूं. टीवी पर उन्हें देखती हूं तो बहुत अच्छा लगता है. मैं इस बात से संतुष्ट हूं कि इस उम्र में मैं भी पीएम नरेंद्र मोदी के इस अभियान में हाथ बंटा पा रही हूं.

मेरे परिवार में कोई भी पुरुष सदस्य नहीं है. छोटी बहू के साथ जीवन जी रही हूं. घर में दो बच्चे हैं. बड़ी बहू गांव में रहती है. हमारी कोशिश है कि मेरी अगली पीढ़ी भी पर्यावरण के प्रति जागरूक हो. लोगों से भी मेरी अपील है कि आप अपने आसपास साफ-सफाई का ध्यान रखें.

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